कोरोना वायरस ने गोरखपुर जिले के कई परिवारों को बर्बाद कर दिया है। दो पीढ़ियां खत्म हो गई हैं। कहीं बाप-बेटे तो कहीं मां, बेटी व पत्नी की मौत हुई है। ज्यादातर मौतें 20 अप्रैल से 15 मई के बीच हुई हैं। ब्रह्मपुर गांव की शशि दुबे के दो जवान बेटे काल के गाल में समा गए। सदमे में पति ने भी दम तोड़ दिया। इससे पहले बहू की मौत हुई थी। अब परिवार में सिर्फ शशि बची हैं। शशि कहती हैं कि कोरोना ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है। अब जीने की इच्छा नहीं बची है। भगवान मुझे भी उठा लें।
कोरोना का कहर: गोरखपुर में कोविड वायरस से मिटीं पीढ़ियां, उजड़ गए कई परिवार
ब्रह्मपुर गांव में शशि दुबे के दो बेटे कोरोना से मरे, सदमे में पति ने भी दम तोड़ा, कहीं पति-पत्नी की साथ उठी अर्थी तो कहीं बाप-बेटे, बहू व बहन की मौत हुई
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कोरोना संक्रमित पादरीबाजार के जंगल सालिकराम की इंद्रावती देवी मौत एक मई को हुई थी। यह सदमा पति व रिटायर ग्राम विकास अधिकारी सुुुभाष पांडेय बर्दाश्त नहीं कर सके। पत्नी की अस्थि विसर्जित करने वाराणसी गए। वहां से लौटे तो तबीयत बिगड़ गई। परिजन अस्पताल ले जाने के प्रयास में थे कि सुभाष ने भी दम तोड़ दिया। इसी तरह पादरीबाजार के मोहनापुर के रामू निषाद (32) की 29 अप्रैल को कोरोना से मौत हो गई थी। उनके साथ ही पूरा परिवार भी कोरोना की चपेट में आ गया था। रामू की मौत के बाद मां परमी देवी (62) अवसाद में चली गईं। गत तीन मई को उन्होंने भी दम तोड़ दिया। आगे की स्लाइड्स में उदाहरण के तौर पर इन केसों को भी पढ़ें...
केस-1: परिवार में चार मौतें, अब एक ही महिला बचीं
ब्रह्मपुर के सर्वेश द्विवेदी (28) की कोरोना से मौत हुई थी। इस सदमे को पिता रामानुज दुबे (65) बर्दाश्त नहीं कर सके और दम तोड़ दिया। सर्वेश के बड़े भाई प्रदीप कुमार द्विवेदी (40) भी कोरोना संक्रमित थे। टीबी अस्पताल में इलाज के दौरान ही प्रदीप मौत हो गई। इससे पहले प्रदीप की पत्नी वंदना दुबे की मौत हुई थी। वंदना के लीवर में कुछ दिक्कत थी।
केस-2: मां-बाप की मौत, बहन ने भी तोड़ा दम
दुर्गाबाड़ी निवासी व दवा कारोबारी नीरज तिवारी की मां कमला देवी (62) व पिता शिवजी तिवारी (65) व विवाहित बहन आशा पांडेय (45) की कोरोना संक्रमण मौत हो गई। इससे पूरा परिवार बिखर गया। आशा माता-पिता की सेवा करने आई थीं लेकिन कोरोना की चपेट में आ गईं। आशा पांडेय का लच्छीपुर के शास्त्रीनगर में नया घर बना है। 14 मई को गृहप्रवेेश था। अब खुशियां मातम में तब्दील हो गई हैं।
केस-3: बाप-बेटे व बहू की मौत से सनसनी
खोराबार इलाके के चंवरी गांव हीरालाल (73), उनके बेटे सुरेश चंद और बहू चंपा देवी पत्नी मनोज की मौत हो चुकी है। पहले पिता की मौत हुई तो संक्रमण की वजह से बेटा उन्हें आखिरी विदाई नहीं दे पाया, दूसरे ही दिन उनकी भी मौत हो गई। इसी बीच बहू ने भी अस्पताल में कोरोना से दम तोड़ दिया। अब भी परिवार के कई लोग संक्रमित हैं। बेटी अनीता, हीरालाल की पत्नी, सुरेश की पत्नी सभी आइसोलेट हैं। परिवार मदद की गुहार भी लगा चुका है।
केस-4: पहले बेटे, फिर मां-पिता की मौत
चौरीचौरा तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत भैसही रामदत्त में बारह दिन के भीतर एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हुई है। पहले वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कुमार उपाध्याय (50) ने इलाज के दौरान 20 अप्रैल को अस्पताल में दम तोड़ा था। आठवें दिन ही मां संयोगिता देवी (78) का देहांत हो गया। सेवानिवृत शिक्षक व संजय के पिता रघुवंश उपाध्याय (80) ने गत दो मई को दम तोड़ दिया। इससे पूरा परिवार बिखर गया है।
केस-5: पहले बाप, फिर बेटे की मौत
कैंपियरगंज के नवापार गांव में शुक्रवार की रात कपिलदेव मिश्रा (80) की मौत हुई, फिर रात एक बजे बेटे बृजेश मिश्रा (48) ने दम तोड़ दिया। तीन घंटे के अंतराल पर परिवार में दो मौतों से पूरा परिवार टूट गया। दरअसल, बृजेश कोरोना पॉजिटिव थे। इलाज के बाद ठीक हो गए थे लेकिन शुक्रवार रात ऑक्सीजन लेवल अचानक कम हुआ और मौत हो गई। बृजेश इस बार वार्ड नंबर 108 से क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) का चुनाव भी जीते थे।