फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कोरोना की लड़ाई में गोरखपुर के ये दंपती बने खतरों के खिलाड़ी, जानें कौन हैं

Mon, 06 Apr 2020 09:46 AM IST
vivek shukla शिवम सिंह, गोरखपुर।
शिवम सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 06 Apr 2020 09:46 AM IST
विज्ञापन
Corona warriors for Dr Ashok and Rachna fight against COVID-19
पत्नी रचना मिश्रा व बेटे आयुष्मान के साथ डॉ अशोक पांडे। - फोटो : अमर उजाला

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आरएमआरसी के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. अशोक पांडे और उनकी पत्नी व पुलिस क्षेत्राधिकारी चौरीचौरा रचना मिश्रा वास्तव में कोरोना योद्धा हैं। सुबह से देर रात तक ड्यूटी, फिर खुद को परिवार से अलग रखकर सुरक्षित करना चुनौतीपूर्ण है, फिर भी इसे उन्होंने स्वीकार किया। सेवा का ऐसा भाव चढ़ा है कि कक्षा चार में पढ़ने वाले बेटे आयुष्मान को खुद से अलग कर दिया। आयुष्मान 25 मार्च से अपनी नानी के पास रह रहे हैं।

Corona warriors for Dr Ashok and Rachna fight against COVID-19
डॉ अशोक पांडे पत्नी रचना व बेटे के साथ। - फोटो : अमर उजाला
दरअसल, गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल के 10 जिलों की जांच आरएमआरसी में हो रही है। इसकी मॉनिटरिंग डॉ. अशोक पांडे के पास है। अब तक कई रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है। इसकी चपेट में घर, परिवार न आ जाए, इसलिए सतर्कता के साथ खुद को अलग कमरे में रखते हैं।
Corona warriors for Dr Ashok and Rachna fight against COVID-19
डॉ. अशोक पांडे के और रचना मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला
जिससे पूरी दुनिया को खौफ, उससे डॉ. पांडे 'खेलते' हैं रोज
गोरखपुर में कोविड-19 के नमूनों की जांच की जिम्मेदारी है आरएमआरसी के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. अशोक पांडे पर, जिस कोरोना वायरस के खौफ ने पूरी दुनिया को हिला दिया है, डॉ. अशोक उसी वायरस की जांच में कई-कई घंटे हर रोज गुजारते हैं। सुबह से लेकर देर रात तक बिना कमर सीधी किए नमूनों की जांच करना अब उनकी आदत में शुमार हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Corona warriors for Dr Ashok and Rachna fight against COVID-19
बेटे आयुष्मान के साथ रचना मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला

परिवार की चिंता किए बगैर वह नमूनों में वायरस तलाशने की प्रक्रिया पूरी करने में जुटे रहते हैं। वायरस भी ऐसा कि एक चूक न जाने कितनों को संक्रमण दे जाए, उनके लिए भी यह खतरा हर पल बना रहता है। बावजूद इसके बस एक ही लगन कि नमूना आया तो विश्लेषण करके जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार करो।

डॉ. अशोक पांडे बताते हैं कि परिवार को हर वक्त चिंता सताती है, लेकिन जिम्मेदारियां इतनी बड़ी हैं कि वह चिंता लैब में घुसते ही पीछे छूट जाती है। खुशी इस बात की है कि देश सकंट में है तो इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली है, जिसे कर्तव्य निष्ठा के साथ निभाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सेफ्टी किट के बिना सेंटर में नहीं जाता हूं। पूरी तरह से सुरक्षित होकर जांच की जाती है। जिससे की कोई और संक्रमण का शिकार न हो।

विज्ञापन
Corona warriors for Dr Ashok and Rachna fight against COVID-19
डॉ. अशोक पांडे के साथ पत्नी रचना मिश्रा व बेटा आयुष्मान। - फोटो : अमर उजाला

खुद की तो सब सोचते हैं, समाज ही परिवार
पुलिस क्षेत्राधिकारी रचना मिश्रा कहती हैं परिवार, यह एक बड़ा शब्द है। अपनों के लिए तो सब जीते हैं। जिस दिन वर्दी पहनी उस दिन से समाज को ही परिवार मानने लगी। आज वह वक्त है, जब इस परिवार के लिए कुछ करने का समय है। शायद यही वजह है कि घर की जिम्मेदारियों को भूल गई हूं। पहली प्राथमिकता कोरोना संकट से जनता को बचाना है।

उन्होंने आगे कहा कि लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराना है। सुबह साढ़े नौ बजे घर से निकलना होता है। कोशिश सिर्फ ड्यूटी के दौरान आम लोगों को इस बीमारी से दूर रखने की होती है। हां, एक बात और कोई भूखा ना सोने पाए, इसका कुछ इंतजाम करके निकलती हूं। सुबह उठने के साथ ही घरवालों के लिए नाश्ते की व्यवस्था व अन्य लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करती हूं।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed