मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच वनटांगिया गांवों की तस्वीर बदल दी है। विकास से दूर इन गांवों तक अब सड़क बन गई है। स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र हैं। बिजली की व्यवस्था हो गई है। आरओ का पानी भी उपलब्ध कराया गया है। हर बार की तरह इस बार भी मुख्यमंत्री वनटांगिया गांव जाएंगे। आगे की स्लाइड्स में देखें फोटोज...
सीएम योगी ने बदल दी इन पांच गांवों की तस्वीर, बच्चे बुलाते हैं 'टॉफी वाले बाबा'
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वनटांगिया गांव विकास से दूर थे। सांसद रहते गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने समस्याएं दूर कराने की कोशिश की लेकिन बहुत सफलता नहीं मिल सकी। मुख्यमंत्री बनते ही योगी आदित्यनाथ ने कुसम्ही जंगल से सटे पांच वनटांगिया गांवों के विकास पर ध्यान दिया। नतीजा है कि वनटांगिया गांवों में विकास दिखने लगा। इन गांवों में रहने वाले परिवारों का राशन कार्ड बन गया। आयुष्मान योजना का लाभ मिलने लगा। मतदाता भी बन गए।
14 नवंबर को वनटांगियां गांव आएंगे मुख्यमंत्री
गोरखनाथ मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 13 नवंबर को अयोध्या में रहेंगे। 14 को सीधे हेलीकॉप्टर से वनटांगिया गांव पहुंचेंगे। वनटांगिया गांव में दिवाली मनाने का सिलसिला 2009 से चल रहा है।
बच्चों में टॉफी वाले बाबा के नाम जाने जाते हैं सीएम योगी
योगी को वनटांगिया गांव के बच्चे टाफी वाले बाबा के नाम से जानते हैं। योगी जब पहली बार वहां गए तो बच्चों को टाफी दिए। उनके लिए कपड़े , मिटाई , आदि लेकर गए पर बच्चे टॉफी को याद कर उन्हें टाफी वाले बाबा के नाम से जानने लगे। आज भी दीपवाली पर जब वह जाते हैं तो लोगों के घरों तक जाकर उनका हाल चाल लेते हैं। वह बच्चों से उसी आत्मीयता से मिलते हैं।
सांसद बनने के साथ ही शुरू किया बदलाव का प्रयास
वनटांगिया के रामगणेश कहते हैं कि वर्ष 1998 में योगी आदित्यनाथ पहली बार गोरखपुर के सांसद बने थे। सांसद के संज्ञान में आया कि वनटांगिया बस्तियों में नक्सली अपनी गतिविधियों को रफ्तार देने की कोशिश में हैं। इस तरह की गतिविधि पर लगाम के लिए योगी ने पहले शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान दिया। सरकारी सहयोग नहीं मिला तो महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़े संस्थानों को जिम्मेदारी दी। एमपी कृषक इंटर कॉलेज, एमपीपीजी कॉलेज जंगल धूसड़ और गोरक्षपीठ से संचालित गुरु श्रीगोरक्षनाथ अस्पताल की मोबाइल मेडिकल सेवा गांवों तक पहुंची। जंगल तिनकोनिया नंबर-3 गांव में 2003 से शुरू प्रयास 2007 तक आते-आते मूर्त रूप लेने लगे।