उत्तर प्रदेश के मुखिया व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ अपने काम को लेकर जाने जाते हैं। ऐसे में हम आपको उनकी एक खास कहानी बताने जा रहे हैं, जब वह पहली बार संन्यास ग्रहण अपने गांव गए थे। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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योगी आदित्यनाथ। (file photo)
- फोटो : अमर उजाला।
योगी आदित्यनाथ 1993 में अपना घर छोड़कर गोरखपुर आए थे। यहां से संन्यास ग्रहण करने के 4 साल बाद वह अपने गांव पंचूर उत्तराखंड पहुंचे। संन्यासी के रूप में योगी आदित्यनाथ की यह पहली पहली यात्रा थी।
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योगी आदित्यनाथ। (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
यह यात्रा परिवार को देखने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें एक संन्यासी जीवन का एक महत्वपूर्ण विधान पूरा करना था। वह था अपने माता-पिता से संन्यासी के रूप में भिक्षा लेने का। माता पिता ने अपने संन्यासी पुत्र को यथोचित भिक्षा के रूप में चावल, फल, और सिक्के दिए।
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सीएम योगी आदित्यनाथ। फाइल
- फोटो : अमर उजाला।
आदित्यनाथ को भिक्षा देते समय उनकी मां फूटफूट कर रोने लगीं। उन्होंने योगी को रोकने की बहुत कोशिश की, कहा कि अब यहां से वापस मत जाओ लेकिन उन्होंने अपना फैसला नहीं बदला। उन्होंने कहा- मां मैं यहां रहने नहीं, भिक्षा लेने आया हूं।
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योगी आदित्यनाथ। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
14 जनवरी 1994 को उन्हें दीक्षा देकर तथा योगी की सभी क्रियाओं को पूरा कर वह 'योगी' बन गए। इसके बाद वह योगी आदित्यनाथ बन गए। उनके वस्त्र आजीवन भगवा रहने वाले थे। भक्त वहीं से उन्हें छोटे महाराज की उपाधि देकर संबोधित करने लगे।