यूपी: शिकारियों की जंजीर में फंसा तेंदुआ, आठ घंटे की मशक्कत के बाद निकला बाहर
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शुक्रवार की सुबह टहलने निकले कुछ लोगों की नजर जंजीर में फंसे तेंदुए पर पड़ी। तेंदुएं को देखकर लोग अवाक रह गए। उसके बाद लोगों ने वनकर्मियों को जानकारी दी। जंजीर में फंसा तेंदुआ भूख-प्यास के बीच करीब आठ घंटों तक तड़पता रहा।
डीएफओ के नेतृत्व में मौके पर पहुंची वनकर्मियों की टीम ने घंटों मशक्कत के बाद तेंदुए को बाहर निकालकर पकड़ने में सफलता पाई। तेंदुए को निचलौल रेंज परिसर लाया। वहां पर डॉ. योगेश कुमार व संतोष जायसवाल ने तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
निचलौल रेंजर दयाशंकर तिवारी का कहना है कि तेंदुआ भोजन की तलाश में जंगल से गांव की ओर रूख करता है। गन्ने के खेत में तेंदुआ रहना ज्यादा पसंद करते हैं। क्योंकि गन्ने के खेत एवं आस पास छोटे जीव आसानी से मिल जाते हैं। जिससे उसकी भोजन की जरूरत पूरी हो जाती है।
जंगल में मानव दखल कम करने की जरूरत है। तेंदुआ अगर भूखा नहीं रहता तो आक्रामक नहीं होता है। तेंदुए बहुत शक्तिशाली और चतुर जीव है और इनकी एकाग्रता तो लाजवाब होती है। शिकार को पकड़ने की तकनीक और हमला करने की शैली इन्हें एक अव्वल दर्जे का शिकारी बनाती है। तेंदुए 56 से 60 किमी प्रति घण्टे की रफ़्तार से दौड़ सकते हैं।