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Chhath puja 2021: नहाय-खाय के साथ आज से शुरु हुआ चार दिनों का छठ महापर्व, बन रहे हैं ये शुभ संयोग

Mon, 08 Nov 2021 12:27 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 08 Nov 2021 12:27 PM IST
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Chhath puja 2021: Chhath Mahaparva of four days started from today with nahay kahy
छठ पर बाजारों में छाई रौनक। - फोटो : अमर उजाला।
चार दिनों तक चलने वाला भगवान सूर्य की उपासना का महापर्व छठ सोमवार यानी आज से नहाय-खाय के साथ शुरू हो रहा है। मंगलवार को खरना, बुधवार को अस्ताचलगामी और गुरुवार को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ महापर्व का समापन होगा। ऐसे में लोग शहर में विभिन्न स्थानों पर बने कृत्रिम तालाबों की सफाई और महेवा थोक मंडी सहित फुटकर मंडियों में छठ के लिए खरीदारी करते नजर आ रहे हैं।


ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पांडेय के अनुसार, माताएं छठ का कठोर व्रत पुत्र के लिए करती हैं। इस व्रत में शक्ति अर्थात माता षष्ठी एवं ब्रह्म अर्थात सूर्यदेव दोनों की उपासना होती है। इसलिए इसे सूर्यषष्ठी कहा जाता है। इस व्रत से जहां भगवान भास्कर समस्त वैभव प्रदान करते हैं, वहीं माता षष्ठी प्रसन्न होकर पुत्र देती हैं, साथ ही पुत्रों की रक्षा भी करती हैं।
Chhath puja 2021: Chhath Mahaparva of four days started from today with nahay kahy
पंडित शरद चंद्र मिश्र। - फोटो : अमर उजाला
चारों दिन ग्रह और नक्षत्रों के शुभ संयोग
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, चार दिनों के छठ महापर्व के सभी दिन ग्रह और नक्षत्रों के शुभ संयोग बन रहे हैं। नहाय-खाय के दिन चतुर्थी तिथि का मान शाम छह बजकर 16 मिनट तक है। मूल नक्षत्र और सुकर्मा योग है। चंद्रमा की स्थिति अपने मित्र बृहस्पति के राशि धनु पर रहेगा। खरना के दिन पंचमी तिथि सायंकाल चार बजकर तीन मिनट तक है। इस दिन पूर्वाषाढ़ नक्षत्र और धृति योग है। चंद्रमा धनु राशि पर स्थित रहेंगे। संध्या अर्घ्य के दिन षष्ठी तिथि का मान दिन में एक बजकर 58 मिनट तक पश्चात सप्तमी है। नक्षत्र उत्तराषाढ़ है। यह रात को नौ बजकर 36 मिनट तक रहेगा। उत्तराषाढ़ का नक्षत्र स्वामी सूर्य ही हैं। इसलिए यह व्रतार्चन के लिए पूर्ण प्रशस्त और उत्तम है। छठ पर्व के अंतिम दिन सूर्योदय 6 बजकर 34 मिनट पर है। इसी समय सूर्योदय कालीन अर्घ्य दिया जाएगा। इस दिन श्रवण नक्षत्र है। जो निर्मल बुद्धि और वैभव की वृद्धि करने वाला रहेगा।

Chhath puja 2021: Chhath Mahaparva of four days started from today with nahay kahy
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय। - फोटो : अमर उजाला
पूजन सामग्रियों की बाध्यता नहीं, सिर्फ व्रत से ही मिलता है फल
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, छठ महापर्व भगवान सूर्य एवं माता छठ की उपासना का पर्व है। ऐसे में इस पर्व को पूरी तरह से इन्हें ही समर्पित करें। बताया कि वैसे तो हर पूजा व्रत में बहुत सी पूजन सामग्रियों का विधान है लेकिन ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। सामग्री की व्यवस्था अपने सामर्थ्य के अनुसार ही की जा सकती है। कुछ न रहने पर व्रत मात्र से ही छठ के पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। पूजन बस विधि-विधान से सही और उचित होना चाहिए।
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Chhath puja 2021: Chhath Mahaparva of four days started from today with nahay kahy
छठ पूजा के लिए खरीदारी करती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला।
पहला दिन : नहाय खाय
नहाय-खाय के अंतर्गत व्रती महिलाएं नदी, तालाब आदि में जाकर स्नान करेंगी। घर आकर खाने में कद्दू व चावल बनाएंगी। इसे कद्दू भात कहते हैं। व्रती सभी को भोजन करवाती हैं, लेकिन स्वयं संकल्पबद्ध होकर उपवास करती हैं एवं रात्रि में भूमि पर शयन करती हैं।

दूसरा दिन : खरना
इस दिन व्रती महिलाएं उपवास करेंगी। शाम को पूजा करने के उपरांत व्रत का पारण करेंगी। व्रत खोलने में नैवेद्य और प्रसाद का उपयोग करेंगी। शाम को सूर्य भगवान की पूजा करने के पश्चात खीर पूड़ी का भोग लगाकर हवन किया जाता है।
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Chhath puja 2021: Chhath Mahaparva of four days started from today with nahay kahy
छठ पूजा के लिए खरीदारी करती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला।
तीसरा दिन : संध्या अर्घ्य
व्रती दिनभर अन्न जल ग्रहण नहीं करेंगी। शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को तालाब या नदी में अर्घ्य देंगी। आटे का ठेकुआ और विभिन्न प्रकार के फल प्रसाद रखेंगी तथा उसे सूर्य नारायण और छठ माता को अर्पित करेंगी। इस दिन सूप और डलिया में ढोने का पौराणिक महत्व है। इसे ढोने का कार्य व्रती महिला के पति या पुत्र करते हैं। वह इसे जलाशय तक ले जाते हैं। शाम को महिलाएं सूर्य की पूजा करती हैं। उन्हें जल और दूध का अर्घ्य प्रदान करती हैं। इस दिन शाम पांच बजकर 27  मिनट पर व्रती महिलाएं अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी।

चौथा दिन : उगते हुए सूर्य को अर्घ्य
व्रती ब्रह्म मुहूर्त में नई अर्घ्य सामग्री लेकर जलाशय में खड़ी होकर अरुणोदय की प्रतीक्षा करेंगी। क्षितिज पर अरुणिमा दिखाई देने के साथ ही, मंत्रोच्चार के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य देंगी। इसके बाद वह ब्राह्मणों को दान कर व्रत का पारण करेंगी। इस दिन सूर्य को अर्घ्य सुबह छह बजकर 34 मिनट पर दिया जाएगा।
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