सिर पर दउरा लेकर घाटों पर जाते लोग पीछे-पीछे ‘हे छठी मईया हर लीं बलैया’..., ‘कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए’..., ‘रिमिक झिमिक बोलेलीं छठी मईया’... छठ गीत गाती महिलाएं, पटाखे जलाते बच्चे, ढोल-तासों की गूंज के छठी मईया के जयकारे, कुछ ऐसा ही नजारा शुक्रवार को छठ पर्व के तीसरे दिन शहर के राजघाट, सूर्यकुंड, गोरखनाथ, महेसरा, तकिया घाट, मानसरोवर, रामगढ़ ताल सहित तमाम घाटों पर दिखा। जहां व्रती महिलाओं ने पानी में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया और संतान, पति के साथ परिवार के सभी सदस्यों के लिए मंगलकामना की।
तस्वीरें: ‘हे छठी मईया हर लीं बलैया’ गीतों के साथ मना छठ, घाटों पर उमड़ा जन सौलाब
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जैसे-जैसे अर्घ्य देने का समय निकट आया घाटों पर छठ माता के जयकारे गूंजने लगे। शाम को अरुण देव की लालिमा निहारते हुए महिलाओं ने माता का आह्वान किया। परिवार के पुरुष सदस्यों और पंडितों ने सूर्य देव को अर्घ्य दिलाया। गोरखनाथ मंदिर में भी छठ व्रत की छटा देखने को मिली। बड़ी संख्या में महिलाएं भीम सरोवर में पहुंची और सूर्य को अर्घ्य देकर संतान की दीर्घायु के लिए प्रार्थना की। इस दौरान छठ माता के गीत वातावरण में गूंज रहे थे। इसी प्रकार मानसरोव, सूर्यकुंड सहित सभी घाटों पर व्रती महिलाओं की भीड़ रही।
अस्थाई घाटों पर भी रही भीड़
शहर के बौलिया कॉलोनी, कूड़ाघाट आवास विकास कॉलोनी, इंजीनियरिंग कॉलेज, बिलंदपुर, गोरखपुर विश्वविद्यालय, बेतियाहाता, मोहद्दीपुर, शाहपुर, विष्णुपुरम, रुस्तमपुर, सहारा स्टेट, गीता वाटिका सहित शहर के कई क्षेत्रों एवं कॉलोनियों के आसपास अस्थाई तालाब बनाए गए थे। घाट बनाकर उसे सजाया संवारा गया था। लाइटिंग के विशेष इंतजाम किए गए थे। व्रती महिलाओं के परिवार वालों ने इन स्थाई घाटों को सुंदर ढंग से सजावट की थी। जहां महिलाओं ने शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया।
घरों में भी हुई छठ की पूजा-अर्चना
कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार बड़ी संख्या में व्रती महिलाओं ने घर की छतों पर एवं आंगन में कृत्रिम कुंड तैयार किया जिसमें पानी भरकर उसी में पानी में खड़ी होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया।