गोरखपुर शहर के सर्किट हाउस इलाके में शुक्रवार की शाम, रोज की तरह सामान्य नहीं थी। शाम के 7.30 बजते ही इस इलाके में करीब एक किलोमीटर के दायरे तक की बिजली गुल हो गई। अभी कोई कुछ समझ पाता कि लड़ाकू विमान की गरज से पूरा इलाका थर्रा उठा।
गोरखपुर में ब्लैक आउट: अंधेरे में डूबा सर्किट हाउस क्षेत्र, सायरन, लड़ाकू विमान की गरज से उड़ गए होश
चौंकिए नहीं, यह कोई असल का हमला नहीं बल्कि हवाई हमले से बचाव का ब्लैक आउट (प्रकाश प्रतिबंध) अभ्यास था। इस अभ्यास के दौरान संवेदनशील क्षेत्र में नागरिक सुरक्षा कोर, विभिन्न विभागों के साथ संयुक्त तौर पर आपात समय में बचाव की तैयारियां जांचता है। लाइटें बंद कर दी जाती हैं ताकि हवाई हमला करने वाले लड़ाकू विमान के पायलट आबादी वाले इलाकों या यूं कहें कि शहर की लोकेशन को लेकर भ्रमित हो जाएं।
1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान शहर में वास्तविक ब्लैक आउट हुआ था। तबसे आज तक इसका कभी अभ्यास नहीं हुआ। करीब पांच दशक बाद शासन के निर्देश पर शुक्रवार को यह अभ्यास हुआ। इसकी रूपरेखा 10 दिन पहले ही तैयार कर ली गई थी। शाम सात बजे नागरिक सुरक्षा के सभी सेवाओं के ऑफिसर कमांडिंग और स्वयंसेवक चंपा देवी पार्क पहुंचे।
अभ्यास को लेकर आमजन के बीच किसी तरह की गलतफहमी न हो और कोई इसे सही का हमला न समझ बैठे, इसके लिए इस अभ्यास का प्रचार-प्रसार किया गया। 7.28 बजे चंपा देवी पार्क, एनेक्सी भवन और सर्किट हाउस में सायरन बजाकर हवाई हमले के संकेत दिए गए। ठीक 7.30 बजे बिजली कट गई।
पैडलेगंज -नया सवेरा मार्ग पर चार या दो पहिया लेकर आने-जाने वाले सभी लोगों से स्वयं सेवकों ने गाड़ियों की रोशनी धीमी करने की अपील की। रात 8.30 बजे वायु सेना के लड़ाकू विमान ब्लैक आउट क्षेत्र और उसके आसपास से गुजरे। कंट्रोल रूम से ग्रीन सिग्नल के लिए एक आवाज में तीनों स्थानों से सायरन गूंज उठा। ठीक दो मिनट बाद ऑफिसर कमांडिंग, रेकी ऑफिसर, घटना नियंत्रण अधिकारियों ने हवाई हमले से हुई क्षति का निरीक्षण किया।
अग्निशमन दल, फर्स्टएड रेस्क्यू की कुछ टीमें चंपा देवी पार्क में घायलों को बचाने, उन्हें अस्पताल पहुंचाने के कार्य में जुट गईं तो कुछ टीमें सर्किट हाउस और एनेक्सी भवन में आग बुझाने का अभ्यास करने के साथ ही घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने और उनके इलाज में मशगूल हो गईं। रात करीब नौ बजे यह अभ्यास समाप्त हुआ। सभी टीमों ने नियंत्रण कक्ष को रिपोर्ट किया जिसके बाद डीएम ने सभी को संबोधित किया।
ब्लैक आउट की वह तस्वीर याद कर आज भी सहम जाता हूं
गोरखपुर शहर के साहबगंज के रहने वाले ट्रांसपोर्टर सुरेश जालान बताते हैं कि 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान शहर में असल का ब्लैक आउट हुआ था। युद्ध समाप्त होने तक पूरे शहर में जो भय का माहौल था। उसे यादकर आज भी जेहन में खौफ बैठ जाता है। मैं, तब 10 साल का था। पूरे शहर की बिजली काट दी गई थी। घरों में लालटेन और ढेबरी से काम भर की रोशनी की जाती थी।
गलती से खिड़की खुलती और रोशनी बाहर जाती तो तत्काल सड़क से पुलिस की आवाज सुनाई पड़ जाती- बंद करो खिड़की, वर्ना गोली मार देंगे। ब्लैक आउट का यह सिलसिला युद्ध खत्म होने तक बना रहा। कुछ दिन पहले जब अखबारों में यह सूचना मिली कि जिला प्रशासन, नागरिक सुरक्षा कोर और अन्य विभाग मिलकर ब्लैक आउट का अभ्यास करने जा रहे हैं, तो पुराना मंजर फिर आंखों के सामने तैर उठा। ईश्वर न करे कि कभी युद्ध की स्थिति बने।