क्या कोरोना वायरस, संक्रमण का शिकार हुई नई शादीशुदा महिलाओं के गर्भ के क्षरण का कारण बन रहा है। यह जानने के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज का माइक्रोबायोलॉजी विभाग शोध करेगा। माना जा रहा है कि पूर्वांचल में कोविड को लेकर इस तरह का पहला शोध होगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
जानकारी के मुताबिक कोरोना वायरस पर दुनिया भर में शोध चल रहे हैं। शोध में रोज नई-नई बातें सामने आ रही हैं, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट नतीजे सामने नहीं आए हैं। इस बीच बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने हाल ही में विवाह करने वाली महिलाओं पर शोध का फैसला लिया है।
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फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
इसके तहत उन महिलाओं पर शोध होना है, जो शादी के बाद संक्रमित हुईं और ठीक हो चुकी हैं। लेकिन, उनका गर्भ रुक नहीं रहा है। माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि इसके तहत यह पता लगाया जाएगा कि कहीं कोरोना वायरस की वजह से गर्भ रुकने में परेशानी तो नहीं आ रही है। अगर ऐसा होगा तो यह पूरे देश के लिए बड़ा मामला होगा। अब तक पूर्वांचल में इस तरह के शोध नहीं हुए हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : PTI
विभाग इस समस्या से पीड़ित महिलाओं से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है, जो कोविड संक्रमण से उबरने के बाद गर्भवती हुईं हैं। इनमें भी खासतौर पर नई शादीशुदा महिलाओं को केंद्र में रखा गया है। ऐसी गर्भवती महिलाओं को चिह्नित करके उन्हें माइक्रोबायोलॉजी विभाग में शोध करने वाले शोधार्थी के संपर्क में रहने को कहा गया है। गर्भ से संबंधित कोई दिक्कत आने पर उन्हें शोधार्थी को जानकारी देने की सलाह दी गई है। इसके बाद से आधा दर्जन महिलाओं ने संपर्क साधा है।
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डॉ. अमरेश सिंह।(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
गर्भ न रुकने की आ रही है परेशानी
बीआरडी के माईक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि गर्भ न रुकने के कुछ मामले सामने आने के बाद इस पर शोध का फैसला लिया गया है। नई शादीशुदा महिलाएं इस तरह की शिकायतें लेकर आ रहीं हैं। इस बीच यह जानकारी भी मिली है कि वह कोरोना वायरस से संक्रमित भी हुईं थीं। ऐसे में यह अपने आप में बड़ा मामला है।