भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरपीएन सिंह को अपने पाले में लाकर अति पिछड़ा वर्ग के सैंथवार मतदाताओं को साधा है। गोरखपुर-बस्ती व आजमगढ़ मंडल के अलग-अलग जिलों में सैंथवार समाज के लोगों की आबादी करीब 25 लाख है। कई विधानसभा सीटों पर वे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह को सैंथवार समाज का बड़ा नेता माना जाता है। कुशीनगर के साथ ही आसपास के जिलों में उनका अच्छा प्रभाव है। कुशीनगर की पडरौना व हाटा विधानसभा क्षेत्र में ही सैंथवार मतदाताओं की संख्या बहुत अच्छी है। हाटा विधानसभा क्षेत्र से सैंथवार समाज की दावेदारी मजबूत रहती है।
UP Election 2022: भाजपा ने आरपीएन को अपना बना सैंथवार मतदाताओं को साधा, निर्णायक भूमिका निभाता है यह समाज
सपा की धार कुंद करने की रणनीति
स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चौहान को अपने पाले में लाकर सपा नेता उत्साहित हैं, लेकिन भाजपा ने उनकी धार कुंद करने की रणनीति बनाई है। स्वामी प्रसाद मौर्य कुशीनगर की जिस पडरौना सीट से विधायक हैं, उसी सीट से आरपीएन सिंह चुनाव लड़ते थे। आरपीएन ने 1996, 2002 और 2007 का विधानसभा चुनाव इसी सीट से जीता था। 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने उन्हें कुशीनगर से अपना प्रत्याशी बना दिया था। चुनाव जीतकर आरपीएन दिल्ली चले गए। लिहाजा, विधानसभा की सीट खाली हो गई। उपचुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्य को जीत मिल गई।
अब आरपीएन को अपने पाले में लाकर भाजपा ने सपा को जवाब दे दिया है। साथ ही स्वामी प्रसाद के जाने से होने वाले नुकसान की भरपाई का काम तेज कर दिया है। इसी तरह वन मंत्री दारा सिंह चौहान मऊ की मधुवन सीट से विधायक हैं। इस सीट पर सैंथवार मतदाताओं की संख्या अच्छी है। ज्यादातर लोग आरपीएन को अपना नेता मानते हैं।
तीन बार विधानसभा व एक बार सांसद का चुनाव जीते
तीन बार विधानसभा का चुनाव जीते आरपीएन सिंह ने 2009 में कुशीनगर से पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीतकर दिल्ली पहुंच गए। मनमोहन सरकार में केंद्रीय भूतल परिवहन राज्यमंत्री बनाए गए। इसके बाद केंद्रीय गृह राज्यमंत्री की जिम्मेदारी भी मिली। संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली थी। कांग्रेस ने गत सोमवार को ही उन्हें स्टार प्रचारक बनाया था। आरपीएन के पिता सीपीएन सिंह भी कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे। वह कुशीनगर से सांसद थे। 1980 में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली सरकार में रक्षा राज्यमंत्री बनाए गए थे।
आरपीएन के पिता ने बनवाया था नगर निगम का पुराना सदन भवन
आरपीएन सिंह का गोरखपुर से भी गहरा लगवा है। उनके पिता सीपीएन सिंह ने ही नगर निगम का पुराना सदन भवन बनवाया था। इसकी पुष्टि मेयर सीताराम जायसवाल ने की है। मेयर का कहना है कि जल्द ही आरपीएन सिंह को गोरखपुर बुलाकर सम्मानित किया जाएगा।
जीएम सिंह को पहले ही सदस्यता दिलाई
सैंथवार समाज को जोड़ने की मुहिम भाजपा ने बहुत पहले ही तेज कर दी थी। इससे पहले बसपा के टिकट पर दो बार विधायक रह चुके देवनारायण उर्फ जीएम सिंह को पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई गई थी। जीएम सिंह ने 2002 के चुनाव में बसपा के टिकट पर सहजनवां विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की थी। 2007 का चुनाव हार गए थे, लेकिन बसपा ने राज्यंत्री बनाया था। 2012 का चुनाव बसपा के टिकट पर महराजगंज की पनियरा से लड़े और जीतकर लखनऊ पहुंच गए। अब बसपा से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए हैं। जीएम सिंह भी आगामी विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। जीएम की पहचान सैंथवार समाज के बड़े नेताओं में होती है। इसी तरह सहजनवां की नगर पंचायत अध्यक्ष सुनीता सिंह ने भी पति के साथ भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। वह सैंथवार समाज से आती हैं।
भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि आरपीएन सिंह कद्दावर नेता हैं। भाजपा संगठन को और मजबूती मिलेगी। सब मिलकर दोबारा भाजपा सरकार बनाने का काम करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज से जनता खुश है। जनता चाहती है कि दोबारा सरकार बने। भाजपा का मुख्य एजेंडा विकास व जनकल्याण है। हर अच्छे नेता को जोड़कर आगे बढ़ा जाएगा।
क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी भाजपा डॉ. बच्चा पांडेय नवीन ने कहा कि विरोधी दलों की कुटिल चाल परास्त होगी। प्रदेश में फिर एक बार योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में भाजपा सरकार बनेगी। आरपीएन सिंह के भाजपा में आने से ताकत बढ़ी है। आरपीएन की समाज के हर तबके में अच्छी पैठ है। सैंथवार समाज के बड़े नेता भी माने जाते हैं।