अद्भुत और नयनाभिराम। मंगलवार को यूपी के गोरखपुर जिले के राप्ती तट का नजारा कुछ ऐसा ही था। राप्ती तट, जो मानव काया के अंतिम पड़ाव के रूप में जाना जाता रहा है, उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विकासपरक सोच ने नया आयाम दे दिया। इससे जहां गोरखपुर को एक नई पहचान मिलेगी, वहीं पर्यटन के नक्शे पर स्थापित होने में मदद मिलेगी।
तस्वीरें: यूपी के इस घाट की खूबसूरती देख मंत्रमुग्ध हुए लोग, बोले- 'बाबा त ई जगह को स्वर्ग जइसन बना देहलन'
राजघाट के बाएं तट पर हुए सुंदरीकरण व नागरिक सुविधाओं के निर्माण कार्य के बाद इस तट को महायोगी गुरु गोरक्षनाथ के नाम पर समर्पित किया गया है, जबकि इसके ठीक समानांतर नदी के दाएं तट पर हुए सुंदर निर्माण कार्य के बाद घाट को श्रीराम के नाम पर रामघाट नाम दिया गया है। दोनों घाटों के साथ अंत्येष्टि स्थल के लिए राजघाट भी बनाया गया है। जहां प्रदूषण मुक्त लकड़ी एवं गैस आधारित शवदाह संयंत्र लगाया गया है।
राप्ती नदी के दोनों तटों पर बने गुरु गोरक्षनाथ व श्रीराम घाट की सुंदरता देखते ही बन रही थी। इन तटों पर आने वाले ही नहीं पुल से गुजरने वाले लोग भी इनके सौंदर्य को निहारे बिना आगे नहीं बढ़ रहे थे। लगभग हर किसी की जुबान पर यही बात थी कि मुख्यमंत्री योगी ने श्मशान को भी पर्यटन स्थल बना दिया। दोनों घाटों को सजाने और बनाने में राजस्थान के लाल पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। इससे राजस्थानी शैली की स्थापत्य कला देखते ही बनती है। योगी सरकार से पहले यह स्थान उपेक्षित था। गंदगी का अंबार लगा रहता था। अब नजारा बदल गया है।
एक तरफ मंच पर मुख्यमंत्री योगी लोगों से राप्ती नदी को स्वच्छ बनाने की अपील कर रहे थे, तो दूसरी ओर राजघाट पर उमड़ी भीड़ मेले सा नजारे का एहसास करा रही थी। हर आगंतुक राप्ती तट के नए रूप को देखने के लिए लालायित दिखा। तकरीबन सभी की जुबान पर एक ही बात थी कि बाबा त ई जगह को स्वर्ग जइसन बना देहलन...
राजस्थानी शैली 'गजीबो' और 'पालकी' ने बढ़ाई राप्ती तट की खूबसूरती
लाल पत्थरों पर कलाकारी और कलाकृतियां राजस्थान की खास पहचान हैं। राप्ती तट पर राजस्थान की इसी शैली में बनी ‘गजीबो’ और ‘पालकी’ इसकी खूबसूरती को चार चांद लगा रही है। रंग बिरंगी बिजली की लड़ियों ने इनकी खूबसूरती और बढ़ा दी है। मंगलवार को राजस्थानी शैली में बनी कलाकृतियां एक तरह से सेल्फी प्वाइंट में तब्दील हो गईं थीं।