भाई बलराम की मौत की खबर सुनते ही मासूम रेनू और खुशी फफक कर रो पड़ीं और बिलखकर बोलीं कि अब भाई कभी नहीं आएगा... उनकी यह बात सुनकर पुलिस वालों की आंखों में भी आंसू आ गए। मौके पर मौजूद गांव वाले भी रो पड़े। यही हाल बलराम के माता-पिता का भी है।
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विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
दोनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मां ने रविवार शाम से ही न कुछ खाया है न रात में सोई है। उनकी एक ही गुहार थी कि उनके जिगर के टुकड़े को कैसे भी करके बदमाशों के चंगुल से छुड़ा लिया जाए। इसके लिए पिता महाजन गुप्ता भी प्रयास करते रहे, लेकिन क्रूर बदमाशों ने उनके इकलौते लाल को उनकी गोद से छीन लिया।
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मृतक के घर लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
बताते हैं कि बलराम चार बहनों का इकलौता भाई था। माता-पिता ने उसके लिए बड़ी मन्नतें मांगी थीं, तब जाकर उनकी गोद में बलराम जैसा लाल आया था। यह लोग बड़े अरमान से उसका लालन-पालन कर रहे थे, लेकिन न जाने किसकी नजर लग गई।
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मृतक की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
हैसियत नहीं होते हुए भी बेटे की जान बचाने के लिए पिता महाजन गुप्ता एक करोड़ रुपये देने के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन बदमाशों की क्रूरता ने कुछ और ही कहानी लिख दी। इसी के साथ पुलिस की नाकामी भी उजागर हो गई। अपहरण की सूचना मिलने के लिए बाद पुलिस की शुरूआती हीलाहवाली ने मासूम की जिंदगी छीन ली।
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मृतक का पिता
- फोटो : अमर उजाला
निराश और हताश पिता की अब यही हसरत है कि आरोपितों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। बेटे की मौत की खबर को सुनकर माता-पिता बेहोश हो गए थे। गांव वालों और रिश्तेदारों ने उन्हें किसी तरह ढांढस बंधाया।