आज से 28 साल पहले 24 मई, 1992 को ही मेरठ पुलिस लाइन के फैमिली आवास में लकवाग्रस्त हवलदार महेंद्र सिंह त्यागी की हत्या हुई थी। हत्या दिल्ली के माफिया सरगना तेजपाल गुर्जर ने कराई थी। इसके बाद मेरठ के तत्कालीन एसएसपी बृजलाल ने प्रतिज्ञा ली थी कि एक महीने के अंदर कुख्यात तेजपाल को ठिकाने लगाएंगे।
हवलदार की हत्या का बदला लेने जब नकली बरात लेकर पहुंचा मेरठ का पुलिस अफसर, कुख्यात 'डाॅन' के खात्मे की दिलचस्प कहानी
- तत्कालीन एसएसपी बृजलाल ने ली थी प्रतिज्ञा 1 महीने में लेंगे हवलदार महेंद्र सिंह की हत्या का बदला
- बुलंदशहर के गुलावठी क्षेत्र के उस्तरा गांव में किया था माफिया सरगना तेजपाल गुर्जर को ढेर
माफिया तेजपाल और मेरठ निवासी उसका साथी बब्बू त्यागी कभी साथ रहकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती हरियाणा में संगठित गिरोह बनाकर रंगदारी, जमीनों पर कब्जे अपहरण और किराए पर कत्ल जैसी वारदात करते थे। दोनों तिहाड़ जेल में भी थे दोस्ती में बब्बू ने तेजपाल के विरुद्ध हत्या के मुकदमे में मुख्य गवाह को धमका कर तोड़ लिया और तेजपाल जेल से बाहर आ गया।
रिहा होने पर तेजपाल ने रंगदारी और अन्य अवैध धंधों पर कब्जा कर लिया। बब्बू भी कुछ दिन बाद बाहर आ गया और मेरठ जिले का यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष बन गया। मेरठ जिले में सत्ता के रसूख से उसे गनर मिल गया। उसने अपने बिरादरी के हवलदार महेंद्र सिंह त्यागी को अपना गनर रखा। वर्चस्व के लिए बब्बू त्यागी और तेजपाल गैंग के बीच खून खराबा शुरू हो गया।
गैंगवार में दोनों तरफ के गुर्गे और कई कारोबारी भी मारे गए। बब्बू अपने गनर के साथ केस की तारीख पर पटियाला हाउस कोर्ट गया था, जहां तेजपाल का घात लगाए बैठा था। उसने स्वचालित हथियारों से बब्बू को ढेर कर दिया। हमले में गनर महेंद्र त्यागी बच तो गए परंतु रीढ पर लगी गोली से लकवा मार गए। जिसके बाद वह पुलिस लाइन के सरकारी मकान में कैद होकर रह गए।
बब्बू त्यागी की हत्या के बाद दोनों गिरोह में घमासान तेज हो गया। त्यागी गैंग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सतवीर गैंग से मिल गया और तेजपाल उसके विरोधी महेंद्र फौजी गैंग से जा मिला। तेजपाल ने इस दौरान बब्बू हत्याकांड के कई गवाहों को ठिकाने लगा दिया। वह हवलदार महेंद्र त्यागी की हत्या की योजना बनाने लगा क्योंकि घायल गवाह के साक्ष्य पर उसे सजा होनी तय थी।
अप्रैल 1992 के अंतिम सप्ताह में तेजपाल ने अपने गुर्गे को पुलिस लाइन मेरठ में महेंद्र त्यागी से मिलने भेजा, जिसने अपने को रविंद्र त्यागी, ग्राम छपरौला के रूप में परिचय दिया और कहा कि आप त्यागी बिरादरी के बड़े प्रभावशाली व्यक्ति हैं। आप चाहोगे तो मेरी जवान बहन का रिश्ता तय हो जाएगा। उसने बहन का बायोडाटा फोटो के साथ उन्हें दे दिया। महेंद्र बोले कि वह तो पूर्णतया अपाहिज हो गए हैं कोई मिलने आता है तो बात चलाता हूं। रविंद्र 10 दिन बाद आने का वादा करके चला गया। मई के दूसरे हफ्ते में वह फिर से पहुंचा।
चाय पानी के बाद महेंद्र ने पड़ोसी सिपाही सेवक राम त्यागी के बेटे को परिवार सहित बुला लिया। लड़के को देखते ही उसने कहा कि अपनी बहन के लिए जैसा रिश्ता चाह रहा था, वैसा मुझे मिल गया। उसने कहा कि वह परिवार में बात करके एक हफ्ते में आएगा और लड़की दिखाने आप लोगों को गाजियाबाद लेकर जाएगा।
24 मई को एक सफेद एंबेसडर कार में एक अन्य व्यक्ति को लेकर सुबह ही पहुंच गया और उस व्यक्ति को अपना बड़ा भाई बताकर परिचय दिया। सिपाही सेवक राम त्यागी पत्नी और बेटे के साथ तैयार हो गए। उसने महेंद्र त्यागी की पत्नी को भी साथ चलने का अनुरोध किया परंतु वह बोली कि पति की नित्य क्रिया बिस्तर पर ही होती है। हाथ पांव बिल्कुल नहीं चलते। ऐसी हालत में वह कैसे जा सकती हैं। इस पर रविंद्र बोला कि दीवान जी के साथ मैं रह लूंगा, आखिर चार-पांच घंटे की ही तो बात है। भैया कार से लोगों को लेकर चले जाएंगे।
इस पर महेंद्र ने पत्नी को भेज दिया। कार में सवार होकर सेवक राम और परिवार को लेकर वह व्यक्ति गाजियाबाद के लिए निकल गया। यहां एक होटल में रोककर खाना खिलाया और आधे घंटे में लड़की को लेकर परिवार सहित आने की बात कहकर बाहर निकल गया। जब 2 घंटे से अधिक समय बीत गया तो ये लोग ग्राम छपरौला पहुंचे। वहां मालूम चला कि यहां रविंद्र नाम का कोई व्यक्ति नहीं है।
इधर, मेरठ में तथाकथित रविंद्र त्यागी ने बहाने से दो अन्य को बुलाया और अपना मित्र बताया। दोपहर करीब एक बजे एक व्यक्ति ने महेंद्र के मुंह पर टेप चिपका दिया और दो अन्य ने 8 और 6 वर्षीय महेंद्र के बच्चों को बाथरूम में बंद करके बाहर से कुंडी लगा दी। इसके बाद नाई के उस्तरे से महेंद्र के गले की मोटी नस काट कर फरार हो गए। थोड़ी देर बाद महेंद्र के एक रिश्तेदार घर पहुंचे तब तक वह मर चुके थे। चेकिंग के दौरान थाना अध्यक्ष बालैनी दुलारेलाल ने तीनों बदमाशों को पकड़ लिया।
एसएसपी ब्रजलाल बताते हैं कि मैंने हवलदार की लाश के सामने जवानों के बीच प्रतिज्ञा की कि तेजपाल को एक माह के अंदर ठिकाने लगा लूंगा। मैंने तेजपाल की दोनों गिरफ्तार गुर्गो से उसके सभी ठिकानों की जानकारी प्राप्त कर ली थी। खुद तीन बार दिल्ली में उसकी कोठी और ठिकानों पर रेड किया था। मेरी योजना थी कि उसके दिल्ली और हरियाणा के ठिकानों पर इतना रेड किया जाए कि वह दिल्ली से निकलने पर मजबूर हो जाए।
मैंने उसके मामा के गांव उस्तरा, थाना गुलावठी बुलंदशहर में जानबूझकर रेड नहीं किया, क्यांकि मैं जानता था कि वह सुरक्षित जगह समझकर वहां अवश्य जाएगा। 18 जून को ही मैंने एसआई बृजपाल सोलंकी और सिपाही रणवीर सिंह के साथ अपने सिपाही का मित्र बन कर रेकी कर ली थी। मुझे 23 जून को जानकारी मिली कि तेजपाल उस्तरा पहुंच गया है। उस समय वहां मुसलमानों की शादियां दिन में होती थी।
मैंने रातों-रात 'शकील वेड्स हमीदा' के पोस्टर तैयार करवाए। गुप्ता बस सर्विस की बस किराए पर लेकर पोस्टर उस पर चिपका दिया। 20 से 25 जवानों की टीम बनाई और सादा कपड़ों में बस से पहुंच गया। जब गांव करीब तीन से चार किलोमीटर रह गया तो मैंने टीम को अपना टारगेट बताया और सबको तेजपाल का फोटो दिखाई। उसकी सबसे बड़ी पहचान थी कि उसके बाएं हाथ की तीन उंगलियां नहीं थीं।