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पर्यावरण विशेष: घर के बेडरूम से पूजा घर तक फैला है प्रदूषण, श्वास नली को कर रहा छोटा

Wed, 05 Jun 2019 08:46 AM IST
देव कश्यप परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 05 Jun 2019 08:46 AM IST
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world environment day 2019: Indoor pollution is also harmful for Life
world environment day

भारत के कई शहर दुनिया के शीर्ष प्रदूषित शहरों की सूची में हैं, फिर चाहे वह दिल्ली हो या नवाबों की राजधानी लखनऊ। हवा, पानी और भोजन इन तीनों के प्रदूषण को लेकर आप परिचित हो सकते हैं, लेकिन क्या कभी आप अपने घर के प्रदूषण के बारे में भी जानते हैं। क्या आप जानते हैं कि घर के अंदर मौजूद प्रदूषित कणों की वजह से आप अपने जीवन में कितने लीटर प्रदूषित हवा ले चुके हैं? स्थिति यह है कि जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया वे सीओपीडी और अस्थमा जैसी बीमारी की चपेट में आ चुके हैं? घर के अंदर का प्रदूषण इंसानों की श्वास नली छोटा कर रहा है। 

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Blood circulation

शरीर में रक्तसंचार और हवा का मेल
चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन के अनुसार, इंसानी शरीर में 90 फीसदी पौष्टिक ऊर्जा ऑक्सीजन और बाकी 10 फीसदी खानपान से मिलती है। एक इंसान के शरीर में करीब 25 ट्रिलियन लाल रक्त कोशिकाएं होती हैं। करीब 20 लाख लाल रक्त कोशिकाएं प्रति सेकेंड बनती हैं। प्रत्येक लाल रक्त कोशिका में 30 करोड़ हीमोग्लोबिन अणु होते हैं। शरीर में 1 लाल रक्त कोशिका लगभग 1200 मिलियन ऑक्सीजन के अणुओं का परिवहन करती है। इससे साबित होता है कि ऑक्सीजन की कमी और प्रदूषित हवा शरीर को किस हद तक प्रभावित कर रही है। 

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दिल्ली में वायु प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

वायु प्रदूषण से भारत में सालाना 25 लाख लोगों की मौत
अक्तूबर 2017 में लासेंट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में वायु प्रदूषण से सालाना 65 लाख लोगों की मौत हो रही है। इसमें सर्वाधिक भारत में 25 लाख से ज्यादा मौतें हो रही हैं। ये आंकड़ा एचआईवी/एड्स, टीबी और मलेरिया से रोगों से होने वाली मौतों से 3 गुना ज्यादा है।  

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Indoor pollution - फोटो : indoorpollution.info

घर के अंदर कौन-कौन सा प्रदूषण
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ग्रामीण इलाकों में घर के अंदर का प्रदूषण काफी है। घर के अंदर काम करने वाली महिलाएं करीब 20 वर्ष में 25 करोड़ लीटर से ज्यादा प्रदूषित हवा ले चुकी हैं। घर के अंदर पार्टिकुलेट मैटर, कार्बन मोनो ऑक्साइड, वाष्पशील प्राकृतिक पदार्थ, पॉली एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन पाए जा रहे हैं, जिनके कारण सीधा असर गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशु, पांच साल तक के बच्चे और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। 

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one mosquito coil equals 100 cigarettes - फोटो : Meditoall

एक मच्छर क्वायल 100 सिगरेट के बराबर करता है प्रदूषण 
साल 2016 और 2017 में किए गए चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन के अध्ययन के अनुसार घर के अंदर दुनिया में करीब दो अरब लोग मच्छर क्वायल का इस्तेमाल करते हैं। 1 मच्छर क्वायल 100 सिगरेट के बराबर प्रदूषण करता है। अगर खिड़की खुली न हो तो दो घंटे से ज्यादा वक्त तक जहरीली हवा रहती है। रात को सोते वक्त इंसान करीब 500 लीटर हवा लेता है। यही जहरीली हवा उसे सबसे ज्यादा असर डालती है। इनके अलावा घर में मौजूद हेयर स्प्रे, रूम फ्रेशनर, फर्श साफ करने वाले क्लीनर, रंग, गोंद और इत्र (डियो) का प्रदूषण भी हवा में मिल जाता है। 

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