देश की राजधानी दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर के पास रेलवे ओवरब्रिज पर कार में लगी आग ने उपेंद्र की दुनिया ही उजाड़ दी। सबसे छोटी बेटी सहित खुद को किसी तरह कार से बाहर निकालने के बाद उसने पत्नी व दो बच्चियों को बचाने की कोशिश की। बदहवास हाल में उसने जलती कार में कूदने का भी प्रयास किया, लेकिन राहगीरों ने पकड़ लिया। देखते ही देखते पत्नी व बच्चियां मौत के आगोश में चले गए।
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कार में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
रोता बिलखता उपेंद्र लोगों से बच्चियों व पत्नी को बचाने की गुहार लगाता रहा। सबसे छोटी बेटी को सिद्धि को पता भी नहीं था कि उसकी दो बहनें और मां उसे हमेशा के लिए छोड़ कर जा चुकी हैं। वह तो बस पिता को रोता हुआ देखकर रोए जा रही थी। इस दर्दनाक हादसे को देखकर वहां मौजूद लोगों का कलेजा भी मुंह को आ रहा था।
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कार में लगी आग
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हादसे की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे उपेंद्र के एक करीबी रिश्तेदार ने बताया कि वह कार बेचने और खरीदने वाली कंपनी कार-24 में नौकरी करता था। बच्चों को घुमाने के लिए अपनी कंपनी से एक माह के लिए कार किराए पर ली थी।
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कार में लगी आग
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रविवार को छुट्टी नहीं होने के बावजूद उसने कंपनी से छुट्टी लेकर पत्नी के कहने पर परिवार को कालकाजी मंदिर दर्शन कराने गया था। शाम करीब 6.00 बजे वापसी के दौरान पत्नी ने अक्षरधाम मंदिर भी घुमाने की बात की। उपेंद्र इसके लिए तैयार हो गया और उसने शकरपुर चुंगी की ओर से कार को अक्षरधाम मंदिर की ओर मोड़ दिया। इसी दौरान वह हादसे का शिकार हो गया। उपेंद्र की छुट्टी उसके परिवार के लिए काल बन गई।
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आपको बता दें कि रविवार शाम करीब 6.30 बजे चलती कार में अचानक आग लगने से महिला और उसकी दो मासूम बेटियों की जलकर मौत हो गई, जबकि कार चला रहा महिला का पति सबसे छोटी बेटी को लेकर किसी तरह कार से बाहर निकल गया। वे मामूली झुलसे हैं। जब तक दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची कार पूरी तरह जल चुकी थी। पुलिस ने शवों के अवशेषों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए एलबीएस अस्पताल भिजवाया है। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट या सीएनजी लिकेज की वजह से आग लगने की आशंका जताई जा रही है।