{"_id":"6aa031229b88df52ff093345","slug":"ganesh-chaturthi-2026-idols-being-made-in-east-delhi-using-clay-from-maharashtra-and-calcutta-delhi-ncr-news-c-503-1-del1005-760-2026-09-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"गणेश चतुर्थी 2026: पूर्वी दिल्ली में महाराष्ट्र और कलकत्ता की मिट्टी से तैयार की जा रही हैं मूर्तियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गणेश चतुर्थी 2026: पूर्वी दिल्ली में महाराष्ट्र और कलकत्ता की मिट्टी से तैयार की जा रही हैं मूर्तियां
विज्ञापन
एक महीने पहले से मिलने लगे ऑर्डर, आकार व कारीगरी के हिसाब से तय होती है कीमत
लाल मिट्टी से बनी मूर्तियों की खास मांग, महाराष्ट्र से लेकर कोलकत्ता तक से आती हैं प्रतिमाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। 14 सितंबर को होने वाले गणेश चतुर्थी पर्व के लिए राजधानी में तैयारियां तेज हो गई हैं। पूर्वी दिल्ली के लोनी रोड सहित कई इलाकों में भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मूर्तिकार छोटी से लेकर विशाल आकार तक की प्रतिमाएं बना रहे हैं और इन दिनों रंग-रोगन व बारीक कारीगरी का काम चल रहा है।
मूर्तिकारों ने बताया कि एक महीने पहले से ही ऑर्डर मिलने शुरू हो जाते हैं। कई ग्राहक अपनी पसंद के आकार, डिजाइन व रंग के अनुसार पहले से मूर्तियां बुक कराते हैं। दुकानदार रमेश ने बताया कि मूर्तियों की कीमत आकार, रंग, बनावट व कारीगरी पर निर्भर करती है। छोटी मूर्तियां घरों के लिए, जबकि बड़ी व आकर्षक मूर्तियां पूजा समितियों व सार्वजनिक पंडालों के लिए जाती हैं।
दिल्ली में रहने वाले मराठी परिवार महाराष्ट्र से लाल मिट्टी मंगवाकर उससे मूर्तियां तैयार करवाते हैं, जिसका धार्मिक व भावनात्मक महत्व अधिक है। वहीं, अन्य राज्यों व समुदायों के लोग भी अपनी परंपरा के अनुसार अलग-अलग स्थानों से मिट्टी मंगवाते हैं। कुछ परिवार खुद महाराष्ट्र जाकर मूर्तियां लाते हैं, तो कुछ कोलकत्ता व अन्य राज्यों से मंगवाते हैं, जिससे राजधानी में विभिन्न राज्यों की कला व मूर्तिकला की झलक भी देखने को मिलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
लाल मिट्टी से बनी मूर्तियों की खास मांग, महाराष्ट्र से लेकर कोलकत्ता तक से आती हैं प्रतिमाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। 14 सितंबर को होने वाले गणेश चतुर्थी पर्व के लिए राजधानी में तैयारियां तेज हो गई हैं। पूर्वी दिल्ली के लोनी रोड सहित कई इलाकों में भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मूर्तिकार छोटी से लेकर विशाल आकार तक की प्रतिमाएं बना रहे हैं और इन दिनों रंग-रोगन व बारीक कारीगरी का काम चल रहा है।
मूर्तिकारों ने बताया कि एक महीने पहले से ही ऑर्डर मिलने शुरू हो जाते हैं। कई ग्राहक अपनी पसंद के आकार, डिजाइन व रंग के अनुसार पहले से मूर्तियां बुक कराते हैं। दुकानदार रमेश ने बताया कि मूर्तियों की कीमत आकार, रंग, बनावट व कारीगरी पर निर्भर करती है। छोटी मूर्तियां घरों के लिए, जबकि बड़ी व आकर्षक मूर्तियां पूजा समितियों व सार्वजनिक पंडालों के लिए जाती हैं।
विज्ञापन
दिल्ली में रहने वाले मराठी परिवार महाराष्ट्र से लाल मिट्टी मंगवाकर उससे मूर्तियां तैयार करवाते हैं, जिसका धार्मिक व भावनात्मक महत्व अधिक है। वहीं, अन्य राज्यों व समुदायों के लोग भी अपनी परंपरा के अनुसार अलग-अलग स्थानों से मिट्टी मंगवाते हैं। कुछ परिवार खुद महाराष्ट्र जाकर मूर्तियां लाते हैं, तो कुछ कोलकत्ता व अन्य राज्यों से मंगवाते हैं, जिससे राजधानी में विभिन्न राज्यों की कला व मूर्तिकला की झलक भी देखने को मिलती है।
विज्ञापन