दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) भले ही सामान्य श्रेणी में बना हुआ है लेकिन खतरनाक पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) कणों में छह मार्च के बाद से बढ़त जारी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, इस बार फरवरी से मार्च के इस हफ्ते तक एक्यूआई राहत वाला रहा है। हालांकि, आने वाले दिनों में हवा की गति मंद पड़ने और तापमान बढ़ने के कारण हवा की गुणवत्ता फिर से खराब हो सकती है।
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वायु प्रदूषण
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सीपीसीबी के मुताबिक, शनिवार को दिल्ली का एक्यूआई स्तर 187, नोएडा का 186, ग्रेटर नोएडा का 200, गाजियाबाद का 218, मानेसर का 138 तथा फरीदाबाद का एक्यूआई स्तर 161 रिकॉर्ड किया गया। 101 से 200 का एक्यूआई स्तर हवा में सामान्य प्रदूषण को प्रदर्शित करता है।
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दिल्ली में प्रदूषण
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फरवरी में हुई बारिश के कारण हवा की गुणवत्ता दिल्ली-एनसीआर में बेहतर बनी रही। इसका प्रभाव अब खत्म होने लगा है। हवा की तेज गति के कारण प्रदूषण अभी सामान्य स्तर पर ही बना हुआ है। हालांकि, हवा की गति कमजोर होते ही स्थिति खराब हो सकती है।
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दिल्ली वायु प्रदूषण
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सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के मुताबिक, शनिवार को दिल्ली-एनसीआर में सतह पर चलने वाली हवा की गति 7.7 किमी प्रति घंटा रही। यह गति प्रदूषण कणों को छांटने में मददगार है। वहीं, अगले दो दिनों तक स्थिति ऐसी ही रहेगी। अगले हफ्ते के अंत तक हवा में प्रदूषण की बढ़ोतरी हो सकती है।
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दिल्ली वायु प्रदूषण
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सीपीसीबी के रियल टाइम निगरानी केंद्र के मुताबिक, शनिवार को हवा में पार्टिकुलेट मैटर 2.5 की स्थिति 75.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 10 की स्थिति 166 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही। पीएम 2.5 का सामान्य मानक 60 और पीएम 10 का सामान्य मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। तेज हवा के कारण यह प्रदूषण कण अभी कम जरूर हैं लेकिन हवा के मंद पड़ते ही इनमें बढ़ोत्तरी शुरू हो जाएगी।