शाहीन बाग...क्या है वहां? जो इसे देश-दुनिया में चर्चित कर रहा है। कुछ महिलाओं का एक सड़क पर तंबू के नीचे बैठना क्या वाकई बहुत बड़ी बात है। या फिर तरह तरह के लोगों का जुटना ही इस जगह को खास बना रहा है। मेट्रो के रूट पर एक स्टेशन है जसोला विहार/शाहीन बाग। किसी से भी पूछें, प्रदर्शन कहां चल रहा है, हर कोई एकदम तत्पर दिखेगा, वो वहां...बस थोड़ी दूर और। रविवार की कुछ ठंडी सी दोपहर में क्या था वहां, आइये देखते हैं।
शाहीन बाग...क्या है वहां? बस एक जज्बा है...जोश है और कुछ बदलने की उम्मीद
फैज की नज्में और कागज की किश्ती
काला चश्मा और ठंड में भी टी शर्ट पहले आरिफ कहते हैं, मैं जामिया का छात्र रहा हूं। आर्ट इंस्टालेशन मेरा बनाया हुआ है। क्या दिखाया है आपने इसमें।...बस इसमें हम आप सब हैं। एक मनुष्य की आकृति जिसके सिर की तरफ दिल्ली पुलिस के दो बैरीकेड रखे हैं और अंदर कागज की किश्ती जिनपर फैज की नज्म...हम देखेंगे। आकृति प्रतीक है एक आम इनसान की और बैरीकेड निर्ममता के। पहले उन्होंने एक दिल बनाया था जिसके सामने एक टैंक था। उसका क्या हुआ। वो...उनका एक सहयोगी कहता है दरअसल पिछले दिनों आई तेज बारिश में बह गया। क्या आप रोज यहां आते हैं? इस सवाल पर आरिफ कहते हैं, नहीं जब समय मिलता है आता हूं, काफी लोगों ने मेरे काम रुचि ली और इसे सराहा।
सबके हाथ एक साथ उठेंगे
उन सब लड़कियों के हाथों में रंग हैं और ब्रश। और कैनवस...बदरपुर को कालिंदी कुंज से जोड़ने वाली सड़क। अच्छा तो आप क्या बना रही हैं? रोड पेंटिंग की तरफ इशारा कर जामिया की आर्ट छात्र रहीं गजाला कहती हैं, जो लोग समर्थ हैं वे तो नए कानून की मुश्किलों से पार पा जाएंगे पर उनका क्या जो मजदूर और मजबूर हैं। हमारी पेटिंग है...सब तरह के लोग एक हों और एक दूसरे की मदद करें। फिर सबके हाथ एक साथ उठेंगे।
प्रदर्शन भी, पढ़ाई भी
सड़क के एक कोने में किताबों का स्टाल सा लगा है। दरअसल यह लाइब्रेरी है। इसका नाम है फातिमा शेख और सावित्री बाई फूले लाइब्रेरी। मकसद है जब लोग यहां आएं या छात्र छात्राएं आएं तो पढ़ें भी। अलग अलग विश्वविद्यालयों से आने वाले छात्र अपनी किताबें यहां दान भी कर दे रहे हैं।
लंगर है तो चाय की भी कमी नहीं
इस प्रदर्शन का कोई संगठित आकार या चेहरा नहीं है। पंजाब से आए सिखों ने लंगर लगाया हुआ है तो कुछ स्थानीय लोग चाय बनाकर ले आए हैं जिन्हें वे रविवार को आने वाली भीड़ को बड़ी सहजता से पिला रहे हैं।
इंडिया गेट, तिरंगा और देश का नक्शा
दिलचस्प यह कि रचनात्मकता के कई आयाम यहां देखे जा सकते हैं। प्रदर्शनकारियों ने इंडिया गेट का माडल बनाया हुआ है। जगह जगह तिरगंा दिखाई देगा और साथ ही 34 फुट ऊंचा भारत का नक्शा भी।