फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

इस डॉक्टर ने बच्चे पर किया अनोखा प्रयोग, एकदम नीला पड़ गया था शरीर

Sat, 30 Sep 2017 09:51 AM IST
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 30 Sep 2017 09:51 AM IST
विज्ञापन
This doctor used a unique experiment on the child the body was completely blue
child
इंसान के हृदय में रक्त पहुंचाने का काम नसों से होता है, अगर इन नसों में कुछ भी गड़बड़ होती है, तो धड़कने कम होने का खतरा रहता है। कुछ इसी तरह के एक बच्चे ने सूडान देश में जन्म लिया। इस बच्चे के जन्म से ही हृदय में उल्टी नसें जुड़ी थीं। गौर करने वाली बात ये है कि बच्चे को जीवनदान देने के लिए डॉक्टरों ने भी अनोखा प्रयोग किया। ऐसा प्रयोग जानबूझकर किया गया, ताकि मरीज का जीवन बच सके।  


 
This doctor used a unique experiment on the child the body was completely blue
child
डॉक्टरों का कहना है कि हृदय से जुड़ी उल्टी नसों को जन्म के 25 दिन के भीतर ठीक किया जा सकता है, लेकिन अगर यह समय निकल जाए, तो बच्चे के पास सिर्फ हृदय प्रत्यारोपण ही एकमात्र विकल्प बचता है। यही वजह है कि इस बच्चे के केस में अनोखा प्रयोग किया गया।

दरअसल, उल्टी नसें जुड़ने की वजह से बच्चे के शरीर में रक्त संचार ठीक से नहीं हो पा रहा था और उसका शरीर एकदम नीला पड़ गया था। सूडान में सुविधा न होने के कारण बच्चे को उपचार के लिए दिल्ली लाया गया। यहां बीएलके सुपर स्पेशलिएटी अस्पताल के हृदय प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. सुशांत श्रीवास्तव और उनकी टीम ने बच्चे का इलाज शुरू किया। करीब साढ़े चार माह का यह बच्चा ऑपरेशन के बाद अब स्वस्थ है।

 
This doctor used a unique experiment on the child the body was completely blue
child
ये है बीमारी
चिकित्सीय जगत में हृदय से उल्टी नसें जुड़ी होने को ट्रांसपोजिशन ऑफ ग्रेट आर्टरी (टीजीए) कहा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, इस बीमारी से पीड़ित शिशु करीब एक हजार में से 20 से 30 होते हैं, जबकि दुनिया भर में एक हजार में से 4 बच्चे ऐसे भी जन्म लेते हैं, जो गंभीर हृदय रोग से पीड़ित होते हैं।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
This doctor used a unique experiment on the child the body was completely blue
child
हृदय प्रत्यारोपण था विकल्प
डॉ. सुशांत ने बताया कि अगर बच्चा जन्म के 25 दिन के भीतर अस्पताल पहुंच जाता, तो एक सर्जरी के जरिये नसों को ठीक किया जा सकता था, लेकिन नसों के नीचे पंप अपनी पूर्ण स्थिति ले लेता है, इसलिए इस बच्चे का यह इलाज संभव नहीं था। अब दूसरा विकल्प था हृदय प्रत्यारोपण, लेकिन इससे पहले इस बच्चे का ऑपरेशन करके नसों में आने वाले रक्त को ही उल्टी दिशा से जोड़ दिया यानी बायीं ओर शुद्ध और दायीं ओर अशुद्ध रक्त का संचार होने लगा, जिसके बाद बच्चे का शरीर धीरे-धीरे ठीक होने लगा।       

 
विज्ञापन
This doctor used a unique experiment on the child the body was completely blue
child
कस्बों और गांवों वाले लें सबक
डॉक्टरों का कहना है कि इस केस से देश के छोटे कस्बे और गांव वालों को सबक लेना चाहिए, क्योंकि अगर कोई बच्चा हृदय रोग के साथ जन्म लेता है, तो उसे बड़े अस्पताल तक पहुंचने में वक्त लग जाता है, लेकिन तब तक स्थिति नियंत्रण के बाहर होती है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed