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आजादी की पहली सुबह इस शख्स ने लालकिले पर उड़ाई पतंग

Sat, 15 Aug 2015 10:23 AM IST
Updated Sat, 15 Aug 2015 10:23 AM IST
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आजादी की पहली सुबह इस शख्स ने लालकिले पर उड़ाई पतंग

The man flew a kite on the first morning of freedom on Red Fort

जिस आजाद हिंदुस्तान की आरजू वीरों ने की थी, वह यह भारत नहीं है। सरकारों की उदासीनता से आजादी के मायने बदल गए हैं। आज भ्रष्टाचार और महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध हावी हैं। आजादी की जंग में परवानों ने शिद्दत से शहादत दी, लेकिन महज कागजों पर सम्मान मिल रहा है। मैंने आजादी की जंग तो लड़ी, मगर उसका तमगा पाने को कोई दावा नहीं किया। आजादी की पूर्व संध्या पर अमर उजाला से विशेष बातचीत में आजादी के बाद पहली बार लाल किले पर तिरंगा पतंग फहराने वाले नसीम मिर्जा बेग चंगेजी (105) ने अनछुई बातें साझा कीं।


(रिपोर्ट: सीमा शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली)

आजादी की पहली सुबह इस शख्स ने लालकिले पर उड़ाई पतंग

The man flew a kite on the first morning of freedom on Red Fort

मुझे आज भी वो पल याद है, जब रेडियो पर आजाद भारत की खबर सुनी। पूरी दिल्ली में जश्न का माहौल था। आजादी की जंग में न कोई हिंदू था न मुसलमान। खबर मिलते ही हम लोग सीधे लाल किला पहुंच गए। घर के पास तिरंगे के रंग की पतंग उड़ाई। बड़ी तिरंगा पतंग उड़ाने पर हर कोई आसमान की तरफ देखकर झूम रहा था। जामा मस्जिद का इलाका मुस्लिम बहुल था, लेकिन यहां हर कोई आजादी के जश्न में डूबा हुआ था। आजाद परिंदों की तरह बस हम लाल किले के बाहर प्रांगण में उड़े जा रहे थे।

आजादी की पहली सुबह इस शख्स ने लालकिले पर उड़ाई पतंग

The man flew a kite on the first morning of freedom on Red Fort

हिंदुस्तान को आजाद करवाने का सपना देखा था, उसी की चाह में भगत सिंह जैसे महान लोगों से मिलना हुआ, जोकि किसी तगमे की चाह में नहीं, बल्कि भारत माता की आजादी के लिए लड़ रहे थे। वर्ष 1929 में दरियागंज स्थित सब्जी मंडी में मेरी पहली मुलाकात भगत सिंह से हुई थी, जब वे ब्रिटिश संसद में विस्फोट करने दिल्ली पहुंचे थे। वे गले में जनेऊ डाले थे। लगा कि कोई पंडित है। साथी दयाराम के साथ मैं उनके आने-जाने से लेकर खाने-पीने का काम संभालता था। उन्हें बताया गया था कि यदि पकड़े गए तो सीधे फांसी होगी। उन्होंने हंसते हुए कहा... मां के लिए एक जीवन तो क्या हजार कुर्बान।

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The man flew a kite on the first morning of freedom on Red Fort

बस इसी बात को गांठ बांधी और आजादी की जंग में कूद गया। चौधरी ब्रह्मप्रकाश, रफात मिर्जा गली शाहतारी, डॉ. मिर्जा अहमद अली शाह गंज, वासुदेव, सुभद्रा जोशी, जहां बेगम, शिवचरण गुप्ता आदि के साथ काम किया। आजादी के बाद हम जश्न में डूबे रहे और कुछ लोग स्वतंत्रता संग्राम के सर्टिफिकेट जुटाने में। कई ऐसे नाम हैं, जो असल में जंग में अपना सब कुछ न्यौछावर कर बैठे, लेकिन आज वे गुमनामी के अंधेरों में हैं।

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The man flew a kite on the first morning of freedom on Red Fort

भारत का विभाजन गलत हुआ, जोकि पंडित नेहरू ने करवाया था। उनकी साजिश का असर आज सीमा पर देखने को मिलता है। अगर उन्होंने गलत फैसला न किया होता तो शायद आज हम दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति होते। मुझे याद है कि मैं अल्लामा मशरिकी के साथ फतेहपुरी होटल में था। वे जिन्ना से टेलीफोन पर बात कर रहे थे, जोकि इंपीरियल होटल में ठहरे हुए थे। अल्लामा ने जिन्ना से विभाजन की बात छोड़ देने को कहा, लेकिन उन्होंने कहा कि मैं मजबूर हूं। खुद मौलाना आजाद ने 30 पेज लॉकर में रखे थे, जिसमें लिखा है कि नेहरू की कुछ गलत बातों ने देश का विभाजन कर दिया। मौलाना के वो कागज आज मेरे पास सबूत के रूप में रखे हैं।

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