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प्रियदर्शिनी दुष्कर्म कांड: जज बोले मुझे मालूम है तुमने हत्या की है, लेकिन छोड़ रहा हूं क्योंकि...

Mon, 16 Dec 2019 03:03 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Mon, 16 Dec 2019 03:03 PM IST
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Priyadarshini Mattoo case culprit Santosh Singh still imprisoned but out on payroll
संतोष सिंह - फोटो : अमर उजाला
कानून की पढ़ाई करने के लिए जम्मू से दिल्ली विश्वविद्यालय आई प्रियदर्शिनी मट्टू को उसके सीनियर संतोष सिंह ने परेशान करना शुरू कर दिया था। पुलिस अधिकारी जेपी सिंह का बेटा होने के नाते संतोष ने बिना डर भय के उसका पीछा करना, अशोभनीय प्रस्ताव रखना और परेशान करना जारी रखा। 


 
Priyadarshini Mattoo case culprit Santosh Singh still imprisoned but out on payroll
priyadarshini mattoo
कई बार शिकायत किए जाने के बाद प्रियदर्शिनी को पुलिस सुरक्षा दी गई। तृतीय वर्ष में पहुंच चुकी प्रियदर्शिनी अपने चाचा के घर में रहती थी। 23 जनवरी 1996 को संतोष यहां आया। उस समय घर के बाहर पुलिसकर्मी भी मौजूद नहीं थे। 

 
Priyadarshini Mattoo case culprit Santosh Singh still imprisoned but out on payroll
कैंडल मार्च - फोटो : अमर उजाला
संतोष ने मौका देखकर प्रियदर्शिनी के साथ बर्बरता से दुष्कर्म किया और फिर बिजली के तार से गला दबाकर हत्या कर दी। उसने 14 बार हेलमेट से वार कर प्रियदर्शिनी का चेहरा भी विकृत कर दिया। इस खबर ने उस समय लोगों को अंदर तक झकझोर कर रख दिया था। 

 
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Priyadarshini Mattoo case culprit Santosh Singh still imprisoned but out on payroll
संतोष सिंह - फोटो : Social Media
प्रियदर्शिनी के पिता चमन लाल के लिए न्याय पाने का रास्ता आसान नहीं था। पुडुचेरी के आईजी रहे जेपी सिंह (आरोपी संतोष के पिता) निचली अदालत में सुनवाई के दौरान ही दिल्ली पुलिस में ज्वाइंट कमिशनर बन गए। नतीजा यह हुआ कि 1999 में कोर्ट ने संतोष को बरी कर दिया। 

 
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Priyadarshini Mattoo case culprit Santosh Singh still imprisoned but out on payroll
delhi high court - फोटो : PTI
जज जीपी थरेजा ने लिखा कि - "मैं जानता हूं कि तुमने अपराध किया है... लेकिन साक्ष्यों के अभावों के कारण मैं तुम्हें रिहा करने के लिए बाध्य हूं।" मतलब साफ है कि दिल्ली पुलिस ने साक्ष्य जमा करने में पक्षपात किया। आशंका थी कि ऐसा जेपी सिंह के दबाव में हुआ। 

 
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