अपनी मांगों को मनवाने के लिए जहां ओला उबर कैब चालक अड़े हुए हैं वहीं रोजाना कैब की सेवा लेने वालों की हालत खराब हो गई है। कहीं कैब चालकों के विरोध में लोग तोड़फोड़ कर रहे हैं, तो कहीं खुद ओला उबर कैब चालक ही सड़कों पर खड़ी गाड़ियों में तोड़फोड़ मारपीट कर सरेआम गुंडई कर रहे हैं। आगे की स्लाइडों में देखें तस्वीरें...
ये है ओला उबर कैब चालकों की गुंडई, टायर पंक्चर कर मचाया तोड़फोड़, 1.5 लाख टैक्सियां प्रभावित
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गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में अजनारा सोसायटी के पास सोमवार को 12-13 युवकों ने उबर कैब में तोड़फोड़ की। चालक को पीटा और चाभी लेकर भाग गए। सिहानी गेट पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। वहीं, ओला और उबर टैक्सी चालकों ने वैशाली मेट्रो स्टेशन के पास निजी कंपनी के खिलाफ जमकर हंगामा किया। चालकों ने अन्य चालकों की गाड़ियों को रोका और पंचर कर दिया। जिन चालकों ने विरोध किया उनके साथ मारपीट की गई। ओला और उबर टैक्सी चालक करीब दो घंटे तक मेट्रो स्टेशन पर हंगामा करते रहे। सूचना पर पुलिस को देख वे वहां से फरार हो गए।
मंगलवार को सड़क पर टैक्सियां नहीं उतरने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मोबाइल ऐप बेस्ड टैक्सी कंपनियों ने ग्राहकों से इस असुविधा के लिए माफी मांगी है। हालांकि जंतर-मंतर पर चल रहे अनशन और विरोध प्रदर्शन में आए चालकों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। चालकों ने कहा कि कुछ चालक अभी भी टैक्सी चला रहे हैं, जिससे कंपनियों पर फर्क नहीं पड़ रहा है। वह अब ऐसे चालकों व कंपनियों के खिलाफ सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन ऑफ दिल्ली के अध्यक्ष कमलजीत गिल ने कहा कि अभी हमने चालकों से शांतिपूर्वक विरोध करने की अपील की है। अब हम सिर्फ दो दिन का समय दे रहे हैं। उसके बाद अगर चालक सड़क पर उतरकर कुछ करते हैं तो इसके लिए सरकार और कंपनियां जिम्मेदार होंगी।
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अखिल भारतीय उपभोक्ता परिषद के पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार राणा ने बताया कि काफी संख्या में लोग अपनी गाड़ियां ओला और उबर कंपनी के लिए चलाते हैं। इन कंपनियों ने जब से अपनी गाड़ियां खरीदी हैं तब से उनकी गाड़ियों को कम राइड दी जा रही है। कंपनी वाले सबसे पहले अपनी गाड़ी को राइड देते हैं। इतना ही नहीं उन्हें प्रति किलोमीटर पांच से छह रुपये का भुगतान किया जाता है जो कि काफी कम है। तंग गलियों में गाड़ी नहीं जा पाती है। इन गलियों से बुकिंग होती है तो गाड़ी यात्री तक नहीं पहुंच पाती। इस वजह से उन पर कंपनी पैनाल्टी लगाती है। उनकी मांग है कि कंपनी उन्हें सही से भुगतान करे।