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नौकरी छोड़ आधुनिक तरीके से कर रहे मुनाफे की खेती, ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग देख युवा हो रहे आकर्षित

Sun, 11 Apr 2021 11:01 AM IST
पूजा त्रिपाठी एसपी सिंह, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
एसपी सिंह, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sun, 11 Apr 2021 11:01 AM IST
सार

- आर्गेनिक उत्पादों की मांग को देख युवाओं में भी बढ़ा रुझान 
- फार्मिंग डिप्लोमा कर समृद्ध किसान बनने का कर रहे प्रयास

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Greater Noida youth leaving their jobs doing organic farming making career in it
नौकरी छोड़ की खेती - फोटो : अमर उजाला

खेती को मौसम, बाजार का जुआ और कम मुनाफे का काम मानकर जहां कुछ लोग खेती छोड़कर नौकरी की तरफ भाग रहे हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो नौकरी छोड़कर खेती कर रहे हैं। इनका कहना हैं कि यदि खेती में आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल किया जाए तो अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।



साथ ही रासायनिक खादों से बंजर हो रही जमीन को भी बचाया जा सकता है। लोगों की स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और आर्गेनिक उत्पादों की मांग को देखकर शहर के कुछ युवा आर्गेनिक फार्मिंग का डिप्लोमा कर समृद्ध किसान बनने का प्रयास कर रहे हैं।

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राजनेश चंद्र - फोटो : अमर उजाला

लोगों को स्वस्थ जीवन के साथ दे रहें हैं रोजगार
ग्रेनो वेस्ट निवासी राजनेश चंद्र सिंह मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़ किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयास में जुटे हैं। दो साल से गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद के कई गांवों में नई सोच के साथ अनुबंध पर खेती करा रहे हैं। इनके समूह में करीब 100 किसान हैं, जो करीब 550 एकड़ जमीन में आर्गेनिक खेती कर अच्छा मुनाफा पा रहे हैं। राजनेश 2018 से नौकरी के साथ आर्गेनिक खेती कर रहे हैं। पर्याप्त समय नहीं मिल पाने के कारण 2020 में नौकरी छोड़ दी। इनका कहना है कि हेल्दी फूड नाम से कंपनी बनाई है।

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सिद्धार्थ भाटी - फोटो : अमर उजाला

वहीं, खेतों में ब्रोकली, पाकचोई, केल, लेटिस हरा, लेटिस लाल, चेरी टोमैटो, लाल पत्ता गोभी, चाइनीज पत्ता गोभी, फूलगोभी एवं अलग-अलग प्रजाति के खरबूजा व तरबूज, दलहन, तिलहन, गेहूं, बासमती चावल के साथ जड़ी-बूटियां भी उगा रहे हैं। दादरी और इसके आसपास गांव में लीज पर ढाई सौ बीघा जमीन पर वह खुद खेती करा रहे हैं। वहीं, बाकी की जमीन पर अन्य किसानों से खेती करा रहे हैं। इनकी कंपनी से जुड़े किसानों को 20 से 25 फीसदी तक मुनाफा मिल रहा है। वह उत्पादों की होम डिलीवरी भी करते हैं। इसके लिए उन्होंने हेल्दी फूड डॉट काम के नाम से पोर्टल बनाया है। 

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सिद्धार्थ भाटी - फोटो : अमर उजाला

18 साल की उम्र से कर रहे खेती
तिलपता निवासी सिद्धार्थ भाटी 18 साल की उम्र से ही खेती कर रहे हैं। आर्गेनिक उत्पादों की मांग को देख आधुनिक तरीके से बिना रासायनिक खाद एवं कीटनाशक के खेती करना शुरू किया। बेहतर तरीके से खेती करने, फसलों और सब्जियों को कीड़े एवं सड़ने से बचाने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ हर्टिकल्चर टेक्नोलॉजी से आर्गेनिक फार्मिंग का डिप्लोमा कर रहे हैं। इनकी सब्जियों की मांग ग्रेनो वेस्ट की विभिन्न सोसाइटियों में हैं। यहां एक ट्रक सप्ताह में दो से तीन बार डिलीवरी के लिए जाता है। 

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राजेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला

जमीन को बंजर होने से बचा रहे 
दादरी निवासी राजेंद्र सिंह ने बताया कि कई साल से कुछ आर्गेनिक उत्पादों की खेती कर रहे थे, लेकिन लोगों की मांग देखते हुए अब पूर्ण रूप से आर्गेनिक खेती करना शुरू कर दिया है। इनका कहना है कि इससे अच्छे मुनाफे के साथ लोगों को जहरमुक्त सब्जियां भी मिल रही हैं। आर्गेनिक खेती कर हम अपनी पुरखों की जमीन को बंजर होने से भी बचा रहे हैं।

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