गौरव हालदार केसः दिवाली से बना रहे थे अपहरण की योजना, चार दिन में दिया अंजाम
रोहित, नीतेश और मोहित से मुलाकात होने और उनके भी योजना में शामिल होने पर आरोपियों ने साजिश को अंजाम तक पहुंचाने के लिए पहली कॉल 15 जनवरी को डॉ. प्रीति से गौरव के नंबर पर कराई। इसके बाद डॉ. प्रीति ने मात्र चार दिन के भीतर गौरव से न केवल दोस्ती की बल्कि उसे प्रेमजाल में फंसाकर मिलने के लिए विवश कर दिया। प्रीति 18 जनवरी को गौरव से मिलने के बहाने वारदात को अंजाम देने अपने साथियों संग दिल्ली से गोंडा पहुंच गई। टीमों को प्रीति के संबंध में ठोस सुराग मिले हैं। उसे कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है।
अपहरण डॉक्टर की कार में, फिरौती लेने चले थे नीतेश की कार से
पड़ताल में पता चला कि आरोपियों ने गोंडा से गौरव के अपहरण के लिए डॉ. अभिषेक की कार को इस्तेमाल किया था। जबकि फिरौती लेने के लिए आरोपी नीतेश की कार में सवार होकर निकले थे। आरोपियों ने फिरौती की रकम लेने और छात्र को परिजन के सुपुर्द करने का कोई निश्चित ठिकाना नहीं बताया था। वहीं, फिरौती की रकम भी दस लाख रुपये बढ़ा दी थी। परिजन पुलिस को आरोपियों की लोकेशन ट्रैस करने के लिए अधिक समय देना चाहते थे। इसके चलते फिरौती की रकम का वह सौदा कर रहे थे और पूरी रकम का बंदोबस्त नहीं करने की बात कह रहे थे।
फिरौती की कॉल कर नीतेश ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम
फिरौती के लिए 70 लाख रुपये की मांग करने की पहली कॉल रोहित ने की थी। वहीं, नीतेश ने दूसरी कॉल करके साथ ही परिजन को 24 घंटे में यानि शुक्रवार तक रकम का बंदोबस्त न होने पर छात्र की हत्या की धमकी दी थी। लेकिन इससे पहले पुलिस और एसटीएफ ने आरोपियों को दबोच लिया। इधर, दिल्ली पुलिस को जब यूपी से अगवा कर छात्र को उनके क्षेत्र में रखने और आरोपियों के पकड़े जाने की जानकारी हुई तो वह सूरजपुर कोतवाली को लगातार फोन कर घटना के बारे जानकारी हासिल करने का प्रयास करती रही।
डॉ. अभिषेक सिंह ने बंगलूरू से बीएएमएस किया था। उसकी बुआ की शादी बहराइच के पयागपुर में हुई है। बुआ के बेटे रोहित और मोहित का परिचय गौरव से था। मोहित दिल्ली के करोलबाग में कपड़े की एक दुकान पर काम करता था। नजफगढ़ में ही मोहित जिम जाता था, वहीं नितेश भी आता था। दोनों का वहीं परिचय हुआ था। नितेश पर इंश्योरेंस में जालसाजी का मामला दर्ज है। डॉ. अभिषेक ने रोहित और मोहित का इस्तेमाल कर गौरव का अपहरण किया।