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हिरासत में होटल संचालक की मौत, हंगामा

Sat, 30 Apr 2016 09:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Sat, 30 Apr 2016 09:58 AM IST
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after death of prisoner in police kin of dead created furore and stoning
पुलिस कैद में कैदी की मौत - फोटो : सौरभ श्रीवास्तव

पुलिस हिरासत में होटल संचालक की हत्या कर दी गई। मृतक के परिजनों व स्थानीय लोगों ने पुलिस पर जमकर गुस्सा उतारा और ममूरा चौक पर आगजनी के साथ-साथ जाम लगा दिया। पुलिस बल ने जाम खुलवाने का प्रयास किया तो लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा, जहां एक बच्चा घायल हो गया। इस पूरे मामले में मृतक की पत्नी की तहरीर पर फेस-3 थाने में दो पुलिसकर्मी समेत तीन के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। रिपोर्ट दर्ज होने के साथ ही एसएसपी ने दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। मूल रूप से सरधना, मेरठ का रहने वाला विनोद कुमार सिंह (35), पत्नी मंजू और दो बेटों ककू व हर्षू के साथ फेस-3 थाना अंतर्गत ममूरा गली नंबर-3 में सुदेश के मकान में किराए पर रहता था। विनोद पत्नी मंजू के साथ ममूरा में ही होटल चलाता था। सुदेश के ही मकान में सुनील शर्मा नामक व्यक्ति रहता है। विनोद के साले संदीप ने बताया कि सुनील कई बार विनोद की भांजी से छेड़खानी कर चुका है। बृहस्पतिवार रात करीब 11 बजे विनोद ने सुनील के साथ ही शराब का सेवन किया। भांजी के साथ छेड़खानी करने की ही बात पर विनोद ने सुनील को मना किया कि वह आगे से उसके साथ छेड़खानी न किया करे। इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई और दोनों के बीच जमकर हाथापाई हुई।

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पुलिस कैद में कैदी की मौत - फोटो : सौरभ श्रीवास्तव

मामले की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दी गई, जहां फेस-3 थाने से अटैच पीसीआर नंबर-28 माके पर पहुंची। पीसीआर में सरकारी चालक गोपाल कुमार और कांस्टेबल दीपक राठी सवार थे। उन्होंने झगड़े के आरोप में विनोद और सुनील को हिरासत में लिया और पीसीआर के पीछे की सीट पर बैठा दिया। गोपाल पीसीआर चला रहा था और कांस्टेबल दीपक राठी आगे की सीट पर बैठ गया। पीसीआर दोनों को लेकर वहां से चली गई। रात करीब 12 बजे मंजू व उसके परिजन जब फेस-3 थाने पहुंचे तो वहां पर न तो विनोद था और न ही सुनील। परिजनों ने विनोद के बारे में पुलिस से पूछा तो पुलिस ने उन्हें गुमराह किया और कहा कि वह अस्पताल मेडिकल कराने गए हुए हैं थोड़ी ही देर में थाने आ जाएंगे। रात करीब एक बजे थाने पर तैनात पुलिसकर्मियों ने परिजनों को बताया कि सुनील के सिर में चोट आई है और उसका सिटी स्कैन हो रहा है ऐसे में उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जब परिजन सरकारी अस्पताल पहुंचे तो वहां से पता चला कि सुनील की हालत काफी गंभीर थी जिससे उसे दिल्ली स्थित जीटीबी अस्पताल रेफर कर दिया गया।

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पुलिस कैद में कैदी की मौत - फोटो : सौरभ श्रीवास्तव

रात करीब ढाई बजे जब परिजन जीटीबी अस्पताल पहुंचे तो वहां डॉक्टरों ने बताया कि इलाज के दौरान विनोद ने दम तोड़ दिया। उसके सिर पर काफी गंभीर चोट आई है जिससे उसकी मौत हो गई। परिजनों ने जब पुलिस से विनोद के मौत का कारण पूछा तो पुलिस ने बताया कि ममूरा से पीसीआर द्वारा जब विनोद और सुनील का मेडिकल कराने जिला अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी सेक्टर-57 चौक पर चलती पीसीआर वैन से विनोद कूद गया, जिससे उसे गंभीर चोट आई और उसकी मौत हो गई। हालांकि परिजन पुलिस की इस कहानी पर विश्वास नहीं कर रहे हैं। मंजू का कहना है कि पुलिस वालों ने सुनील के साथ मिल कर उसके पति विनोद की हत्या कर दी। पुलिस विनोद को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। इतना ही नहीं साले संदीप का आरोप है कि सुनील अवैध शराब का कारोबार करता है, उसकी सांठ-गांठ पुलिस के साथ है। यह बातें विनोद जानता था, इसीलिए पुलिस ने सुनील के साथ मिल कर विनोद की हत्या कर डाली। पुलिस हिरासत में हुई मौत की वजह से पोस्टमार्टम वीडियो रिकार्डिंग के साथ होना है।

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पुलिस कैद में कैदी की मौत - फोटो : सौरभ श्रीवास्तव

पुलिस पर उतरा गुस्सा, आगजनी : मृतक के परिजनों व स्थानीय लोग शुक्रवार सुबह फेस-3 थाने पहुंचे और उन्होंने पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी। मगर उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी कर रही थी। ऐसे में परिजनों व स्थानीय लोगों ने थाने का घेराव किया। उसके बाद भी जब उनकी सुनवाई नहीं हुई तब जा कर दोपहर 12 बजे सैकड़ों लोगों ने ममूरा तिराहा जाम कर दिया। सड़क पर ही परिजन धरने पर बैठ गए। गुस्साए लोगों ने तिराहे पर आगजनी कर दी। ऐसे में ट्रैफिक रुक गया। जैसे ही पुलिस को पता चला कि ममूरा तिराहे पर आगजनी की जा रही है। फौरन वहां पर भारी पुलिस बल व पीएसी के जवान भेजे गए। दो फायर टेंडर पहुंचे। आग बुझाई गई और पुलिस ने जैसे ही लोगों को धरने से उठाने का प्रयास कर रही थी वैसे ही लोगों ने पुलिस बल पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस ने समझाने-बुझाने के बजाय लोगों पर लाठी चार्ज कर दिया। जिससे ममूरा निवासी वरूण (15) को चोट लग गई। उसके पैर पर लाठी बरसाई गईं, जिससे वह घायल हो गया। फौरन पुलिस अधिकारियों ने उसे सरकारी गाड़ी से उपचार के लिए अस्पताल भेजवाया। इस दौरान हालात नियंत्रण के लिए लगाए गए कई पुलिसकर्मियों ने बॉडी वोर्न कैमरा लगा कर ड्यूटी की जिससे पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई।

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पुलिस कैद में कैदी की मौत - फोटो : सौरभ श्रीवास्तव

एसएसपी फोन पर, मौके पर कोई डीएसपी नहीं : यह जिले का हाल है जहां शहर के सभी डीएसपी छुट्टी पर हैं। जिस इलाके की घटना है उसके डीएसपी डॉ. अनूप कुमार का ट्रांसफर चार दिन पूर्व हो चुका है। चार्ज छोड़ा नहीं है बल्कि छुट्टी पर चल रहे हैं। शहर में तैनात एएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर जिनके पास सर्किल-1 का चार्ज है वह भी छुट्टी पर हैं। सर्किल-3 का चार्ज संभाल रहे डीएसपी अरविंद यादव की ड्यूटी दिल्ली स्थित मुख्यमंत्री आवास पर थी, ऐसे में वह भी शहर में मौजूद नहीं थे। खास बात यह है कि पुलिस हिरासत में हुई मौत जैसी गंभीर घटना और उसके बाद हुई आगजनी और पथराव के बाद भी एसएसपी किरण एस. मौके पर नहीं पहुंचे। वह फोन से ही एसपी सिटी दिनेश यादव से हालात का जायजा लेते रहे। पूरे फोर्स को संभालने व लीड करने वाले मौके पर एसपी सिटी दिनेश यादव व सिटी मजिस्ट्रेट बच्चू सिंह ही थे। अगर सही वक्त पर हालात पर नियंत्रण पाने में पुलिस फोर्स कामयाब न हुई होती तो शायद पुलिस की इस करनी से गुस्साए लोग सड़क पर वाहनों व दुकानों को आग के हवाले कर देते। 

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