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निठारी कांड: शवों से दरिंदगी करने वाले सुरेंद्र कोली को सजा सुनाते ही जज ने तोड़ दी कलम
Sun, 03 Mar 2019 01:59 AM IST
शाहरुख खान
राहुल कुमार, अमर उजाला, गाजियाबाद
राहुल कुमार, अमर उजाला, गाजियाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 03 Mar 2019 01:59 AM IST
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सुरेंद्र कोली
- फोटो : ANI
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सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अमित वीर सिंह की अदालत ने अपने 78 पेज के फैसले में सुरेंद्र कोली को समाज के लिए अमानवीय, बर्बर, पिशाची प्रकृति का बताया। उन्होंने कहा कि कोली नेक्रोफीलिया (शवों से दरिंदगी करने की प्रवृति) व नेक्रोफेजिया (शव को खाने की प्रवृति) जैसी बीमारी से ग्रसित है। अदालत ने कोली को सजा सुनाने के बाद फैसले पर ही अपनी कलम तोड़ दी। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ‘अमानवीय, बर्बर, पिशाची प्रकृति का कोली मुल्जिम है। उसके कृत्य ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। अगर उस पर किसी प्रकार की दया दिखाई गई तो समाज कान्याय व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा।
आरोपी सुरेंद्र कोली
फैसले में लिखा कि अभियुक्त के कृत्य विरल से विरलतम श्रेणी में आते हैं। ऐसे में अभियुक्त के साथ उदारता का व्यवहार करना समाज एवं विधि के न्यायसंगत सिद्धांतों से खिलवाड़ करना होगा। न्यायालय के समक्ष साबित हुए आरोप के संदर्भ में अधिकतम दंड देने के अलावा और कोई रास्ता नहीं रह जाता।
सजा सुनने के लिए नहीं आए किशोरी के परिजन
लोक अभियोजक ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि शनिवार को कोर्ट में मृतका किशोरी के परिजन सजा सुनने के लिए आएंगे, लेकिन वह नहीं आए। क्योंकि शुक्रवार को भी दोषी करार दिए जाने के दौरान वह लोग नहीं आए थे। इस मामले में किशोरी के पिता ने मुकदमा दर्ज कराया था। वह इन दिनों नोएडा में ही रह रहे हैं।
सजा सुनने के लिए नहीं आए किशोरी के परिजन
लोक अभियोजक ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि शनिवार को कोर्ट में मृतका किशोरी के परिजन सजा सुनने के लिए आएंगे, लेकिन वह नहीं आए। क्योंकि शुक्रवार को भी दोषी करार दिए जाने के दौरान वह लोग नहीं आए थे। इस मामले में किशोरी के पिता ने मुकदमा दर्ज कराया था। वह इन दिनों नोएडा में ही रह रहे हैं।
पंधेर की कोठी से बरामद हुईं थीं 16 खोपड़ियां
सुरेंद्र कोली
नोएडा सेक्टर-20 थाने की पुलिस ने कोली की निशानदेही पर मोनिंदर पंधेर की कोठी से महिलाओं और बच्चों की 16 छोटी-बड़ी खोपड़ियां बरामद की थीं। कोली पुलिस को कोठी के पीछे हिस्से में बनी गैलरी में ले गया था, जहां पहले से महिलाओं और बच्चों के कपड़े, जूते-चप्पल और अन्य सामान रखे थे। यहीं पर युवती के परिजनों ने उसके कपड़े पहचान लिए थे, जिसके बाद पुलिस ने उसी आधार पर सुरेंद्र कोली पर रिपोर्ट दर्ज की थी।
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फोटो और खोपड़ी के मिलान से हुई थी शिनाख्त
सुरेंद्र कोली के घर के पीछे वाले नाले की तलाशी करते लोग
कोली की निशानदेही पर बरामद हुए अवशेषों को सेक्टर-20 थाने की पुलिस पोस्टमार्टम के लिए भेज रही थी, लेकिन इस बीच यह मुकदमा सीबीआई के पास पहुंच गया था। इसके बाद सीबीआई की टीम ने 11 जनवरी को अवशेषों को कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए एम्स भेज दिया था। इसके अलावा सीबीआई ने किशोरी की खोपड़ी व उसके फोटो चंडीगढ़ की लैब में भेजे थे, जहां वैज्ञानिकों ने शिनाख्त की थी।
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शव मिलने के बाद मच गई थी खलबली
सुरेंद्र कोली की कोठी
निठारी कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए 11 जनवरी 2007 को सीबीआई ने पूरा केस अपने हाथ में ले लिया था। 28 फरवरी और 01 मार्च 2007 को सुरेंद्र कोली ने दिल्ली में एसीएमएम के यहां अपने इकबालिया बयान दर्ज कराए थे। इन बयानों की वीडियोग्राफी भी हुई थी।
इस केस में हुई 38 की गवाही
लोक अभियोजक ने बताया कि मुकदमे में कुल 270 दिन कार्रवाई चली। सीबीआई की तरफ से 38 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की तरफ से केवल इस मामले में दस्तावेज ही दिए गए थे।
इस केस में हुई 38 की गवाही
लोक अभियोजक ने बताया कि मुकदमे में कुल 270 दिन कार्रवाई चली। सीबीआई की तरफ से 38 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की तरफ से केवल इस मामले में दस्तावेज ही दिए गए थे।