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सियासत: लाइमलाइट ले गए राहुल और प्रियंका...सहयोगी दल बरगद के नीचे ही रह गए, मन की खटास बयानों से उजागर

Thu, 08 Oct 2026 03:50 AM IST
दुष्यंत शर्मा पूनम मेहता, नई दिल्ली
पूनम मेहता, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 08 Oct 2026 03:50 AM IST
सार

मंगलवार को जो अखिलेश यादव राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ एक ही बस में हिरासत में लिए गए थे, वही बुधवार को न जंतर-मंतर के प्रदर्शन में दिखे और न कांग्रेस के बुलाए भोजन में।

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Politics: Rahul and Priyanka stole the limelight, alliance partners remained in shadow of the banyan tree
राहुल और प्रियंका गांधी अन्य कांग्रेसियों के साथ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वोट चोरी के खिलाफ विपक्ष के सबसे बड़े सड़क प्रदर्शन के अगले ही दिन इंडिया गठबंधन की तस्वीर से उसका सबसे अहम सहयोगी गायब था। मंगलवार को जो अखिलेश यादव राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ एक ही बस में हिरासत में लिए गए थे, वही बुधवार को न जंतर-मंतर के प्रदर्शन में दिखे और न कांग्रेस के बुलाए भोजन में।

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कांग्रेस इसे देर रात लिए गए फैसले और सूचना की कमी का मामला बता रही है, पर सपा खेमे में सवाल कुछ और है। आंदोलन पूरे विपक्ष का था या सिर्फ भाई-बहन का? सपा सूत्रों के मुताबिक नाराजगी की जड़ सोमवार का घटनाक्रम है। चुनाव आयोग तक मार्च के दौरान राहुल, प्रियंका, अभिषेक बनर्जी और अखिलेश एक ही बस में हिरासत में लिए गए थे। सूत्रों का कहना है कि बीच रास्ते राहुल और प्रियंका बस से उतरकर आकाशवाणी परिसर में धरने पर बैठ गए। करीब 9 घंटे चले इस धरने में कैमरे दोनों पर ही टिके रहे, जबकि बाकी 19 दलों के सांसद आकाशवाणी के बरगद के नीचे किनारे की भूमिका में दिखे।
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गठबंधन की मर्यादा तोड़ने की चर्चा
सपा सूत्र यह भी गिनाते हैं कि कांग्रेस ने गठबंधन की मर्यादा तोड़कर पहले 240 सांसदों के साथ एनेक्सी में मिलने की जिद की और फिर अचानक 100 मीटर दूर आकाशवाणी पर धरने का मोर्चा खोल दिया। सपा की शिकायत है कि मूल मुद्दा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का था, लेकिन पूरे दिन चर्चा राहुल के उस बयान पर सिमट गई जिसमें उन्होंने 45 प्राथमिकियों को 100 तक पहुंचाने की बात कही थी। सपा के लिए यह सवाल महज एक दिन की तस्वीर का नहीं है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा को अगले विधानसभा चुनाव में साथ उतरना है और वहां सीटों से लेकर चेहरे तक हर मोर्चे पर बराबरी का सवाल उठेगा। ऐसे में अखिलेश की गैरमौजूदगी को सपा खेमे में एक सधे संदेश की तरह पढ़ा जा रहा है कि गठबंधन का मंच किसी एक घर की जागीर नहीं बनेगा।
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कांग्रेस का पक्ष
कांग्रेस के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर सफाई दी कि बुधवार के भोजन के लिए इंडिया गठबंधन के सभी दलों को न्योता दिया गया था। उनके मुताबिक भोजन का फैसला मंगलवार देर रात हुआ और सभी दलों को इसकी सूचना दी गई, इसलिए कुछ दलों का न आ पाना स्वाभाविक था। उन्होंने मीडिया की टिप्पणियों को बेवजह बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग के मुद्दे पर विपक्ष एकजुट है। संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी विपक्षी एकता पर जोर दिया।


सपा क्या कह रही है
सपा सांसद आनंद भदौरिया ने कहा कि पार्टी को न मंगलवार के मार्च के बाद के कार्यक्रम की जानकारी थी, न बुधवार के भोजन का न्योता मिला। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि विपक्ष एकजुट है। धर्मेंद्र यादव ने कहा कि मंगलवार के प्रदर्शन के बाद पार्टी के ज्यादातर सांसद अपने क्षेत्रों में लौट गए थे। उनके मुताबिक इस बारे में संवाद नहीं हुआ और भोजन की जानकारी ही नहीं मिली। दोनों पक्षों के बयानों में साफ फर्क है। कांग्रेस कहती है सबको बुलाया था, सपा कहती है बुलावा पहुंचा ही नहीं। खुले मंच पर दोनों दल एकता का दावा दोहरा रहे हैं, पर पर्दे के पीछे की खटास मंगलवार की बस से बुधवार की खाली कुर्सी तक साफ दिखी। गठबंधन की तस्वीर कितनी भी बड़ी हो, उसका फ्रेम एक ही चेहरे का नहीं हो सकता।

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