निर्भया केस में पहले 22 जनवरी फिर 1 फरवरी को भी फांसी की तारीख टलने के बाद अब पूरा देश सिर्फ दोषियों की मौत का ही इंतजार कर रहा है। कानूनी तिकड़मों के चलते निर्भया के दरिंदों को फांसी पर लटकाने की तय तारीख एक बार फिर टल गई। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने बीते शुक्रवार को अगले आदेश तक चारों दोषियों के डेथ वारंट के अमल पर रोक लगा दी। निर्भया के दरिंदों की फांसी भले ही टल गई हो लेकिन तिहाड़ में अब भी फांसी की सारी तैयारियां जारी हैं।
फांसी की तैयारी के लिए सबसे जरूरी होता है फंदा और अगर भारत में बात करें तो यहां गोडसे से लेकर निर्भया के दोषियों तक के फांसी का फंदा एक ही जगह तैयार हुआ है और वो है बिहार की बक्सर जेल। जानिए ऐसी क्या वजह है जो भारत में होने वाली हर फांसी के लिए फंदा बक्सर जेल में ही तैयार होता है.....
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nirbhaya case
- फोटो : सोशल मीडिया
बिहार की बक्सर जेल पूरे देश में होने वाली फांसियों के लिए फंदा बनाता है। यहां तक कि नवंबर 1949 में बक्सर जेल ने बापू के हत्यारे नाथूराम गोडसे की फांसी के लिए भी फंदा तैयार किया था। अफजल गुरु से लेकर 1993 बम ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन और 26/11 के दोषी अजमल कसाब तक सभी को बक्सर जेल में बने फंदे से ही फांसी लगी। हालांकि इसका एक खास और अनोखा इतिहास है और इसी वजह सभी फांसियों के लिए फंदे यहीं से बनते हैं।
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buxar jail
- फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल बक्सर जेल में 1880 से ही फांसी के फंदे बन रहे हैं और यह परंपरा ब्रिटिश शासकों ने शुरू की थी। बक्सर युद्ध में जीत मिलने के बाद जब बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश तक ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपना राज्य स्थापित कर लिया था, तब 1880 में ब्रिटिश शासकों ने बक्सर जेल को फांसी का फंदा बनाने का एकाधिकार दिया। 1880 के चार साल बाद 1884 में बक्सर जेल में मशीन लाई गई ताकि फांसी का फंदा तैयार किया जा सके।
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बक्सर जेल में तैयार फांसी के फंदे के लिए रस्सी
- फोटो : सोशल मीडिया
इससे पहले फांसी का फंदा फिलीपींस की राजधानी मनीला से मंगाया जाता था, यही कारण है कि फांसी के फंदे को मनीला रस्सी भी बोलते हैं। बाद में इंडिया फैक्टरी एक्ट बनने के बाद इस कानून के तहत बक्सर जेल को फांसी का फंदा बनाने का विशेष अधिकार दे दिया और अन्य लोगों को फंदा बनाने से रोक लगा दी गई।
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फांसी का फंदा बाकी रस्सियों से काफी अलग होता है। यह मुलायम होता है लेकिन फिर भी बहुत मजबूत होता है। अंग्रेजों ने बक्सर जिले को फंदा बनाने का खास अधिकार इसलिए दिया क्योंकि यह गंगा नदी के किनारे है और इसमें एक कुआं भी है जो आज के समय में भी किसी जेल में नहीं है। फांसी का फंदा बनाने के लिए एक खास तरह के धागे J-34 का इस्तेमाल किया जाता है। इस धागे के लिए रुई पंजाब में उगाई जाता थी फिर उसे बक्सर जेल को भेजा जाता था। लेकिन अब सप्लायर बना बनाया धागा जेल भेजता है।