फरीदाबाद में अरावली की हसीन वादियों में कला और संस्कृति के सतरंगी रंग बिखर रहे हैं। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में देश-विदेश से आए कलाकार अपने मस्ती भरे गीत-संगीत और नृत्य से दर्शकों का मन लुभा रहे हैं। सोमवार को मेले की चौपाल पर पंजाब पुलिस के कलाकारों ने ऐसा रंग जमाया कि हर कोई उनके साथ झूमता दिखा। देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने मेला परिसर में सांस्कृतिक परेड निकाली, जोकि एक लघु भारत की झांकी प्रस्तुति करती दिखी।
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- फोटो : अमर उजाला
सूरजकुंड मेले की चौपाल पर सुबह जब कलाकारों ने स्वर लहरियों की तान छेड़ी तो वहां आए दर्शक थिरक उठे। कार्यक्रम की शुरुआत मेले के थीम स्टेट हिमाचल प्रदेश के लोक कलाकारों ने बिगुल बजाकर कर की। हिमाचल के मंडी जिले से आए कलाकारों ने असां तां जाणा ठाकुरद्वारा लोकगीत पर मनोहारी नृत्य की प्रस्तुति दी।
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इसके बाद हरियाणवी कलाकारा मोंटी शर्मा व उनकी टीम ने भांग रगड़ कै पिया करूं, मैं कंडी सोटे आला सूं..रागनी पर लोकनृत्य से दर्शकों को भी नाचने पर मजबूर कर दिया। पंजाब पुलिस के कलाकारों ने चौपाल पर ढोलों की थाप छेड़ी तो हर कोई नाचने पर मजबूर हो गया।
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पंजाब पुलिस के कलाकार मस्त अली और हरविंदर कौर ने गीत और नृत्य का सिलसिला शुरू किया तो दर्शकों की बार-बार मांग पर रूकने का नाम ही नहीं लिया। कदे साड्डी गली वी आया करो जी..काला शा काला, मेरा काला ए सरदार, मेरा ढोल जवानियां मारै आदि गीतों पर दर्शक और विदेशी कलाकार तक मंच पर नाचने जा पहुंचे। चौपाल पर कश्मीर की रूबीना ने अपनी साथी कलाकारों के साथ बुमरो-बुमरो श्याम रंग बुमरो गीत पर नृत्य की प्रस्तुति दी तो हर कोई उनके साथ मस्ती से झूमने लगा।
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विदेशी कलाकारों ने भी जमाया रंग
चौपाल पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों के अलावा विदेशी कलाकारों ने भी जमकर रंग जमाया। अफ्रीका महाद्वीप के देश मलावी के लोक कलाकारों ने मलिपेंगा नामक नृत्य की प्रस्तु ति दी। इसमें उन्होंने दिखाया कि युद्ध के बाद सैनिक जीत की खुशी में अपने राजा के सामने परंपरागत वाद्य यंत्रों की धुन पर नाचते है तो साथ ही शहीद हुए सैनिकों से बिछुड़ने की भावना भी व्यक्त की जाती है।