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Nirbhaya Case: फांसी पर रोक से फूट-फूटकर रो पड़ीं निर्भया की मां, बोलीं- मैं अब हार चुकी हूं
Mon, 02 Mar 2020 09:08 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 02 Mar 2020 09:08 PM IST
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nirbhaya case
- फोटो : अमर उजाला
अदालत ने निर्भया के दोषियों के डेथ वारंट पर सोमवार को तीसरी बार रोक लगा दी। इस फैसले से आहत निर्भया की मां फूट-फूट कर रोयीं। उन्होंने कहा कि दोषियों के वकील हर बार कानून के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और कानून भी दोषियों का साथ दे रहा है। मैं अब पूरी तरह हार चुकी हूं। निर्भया की मां दोषियों की फांसी पर रोक को लेकर सोमवार को पटियाला हाउस कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान यही दुआ मांगती रहीं कि दोषियों की फांसी पर इस बार रोक नहीं लगेगी, लेकिन अंत में अदालत ने दोषियों की फांसी पर कानूनी प्रावधानों के मद्देनजर रोक लगा दी।
निर्भया की मां
- फोटो : ANI
निर्भया की मां ने इस फैसले पर बेहद नाराजगी जताते हुए कहा कि मैं बीते सात सालों से अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रही हूं। मैं हर बार हिम्मत बटोरकर अदालत से दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी करवाने के लिए खड़ी होती हूं और मुझे लगता था कि इस बार दोषियों को कोई नहीं बचा सकता।
निर्भया की मां
- फोटो : PTI
उन्होंने रोते हुए कहा कि दोषी खुलेआम कानून के साथ खेल रहे हैं और अदालत के सख्त निर्देशों के बावजूद दोषियों ने अपने कानूनी विकल्पों का प्रयोग योजनाबद्ध तरीके से किया ताकि उनकी फांसी पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि दोषियों के वकील कभी कोर्ट को बताते हैं कि वह दोषी का केस नहीं लडे़ंगे और फिर दोबारा से अचानक दोषी की पैरवी करने लगते हैं। दोषी फांसी के लिए तय तिथि से एक या दो दिन पूर्व दया याचिका दाखिल करते हैं। मेरा सवाल है कि आखिर उन्हें इतना समय क्यों दिया जा रहा है।
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निर्भया की मां और पिता
- फोटो : PTI
उन्होंने कहा कि अदालत हर बार फांसी को क्यों टाल रही है। लगातार दोषियों की फांसी टलने से सिस्टम की नाकामी साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि पूरा सिस्टम अपराधियों के पक्ष में है। उन्होंने दोषियों द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज करने की मांग करते हुए राष्ट्रपति से भी अनुरोध किया था कि वे फांसी की सजा को कायम रखें ताकि तीन मार्च को दोषियों को फांसी पर लटकाया जा सके।
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Nirbhaya Case
- फोटो : अमर उजाला/सोशल मीडिया
उल्लेखनीय है कि 16-17 दिसंबर 2012 की रात फिथिजियोरेपी की 23 वर्षीय छात्रा से दक्षिणी दिल्ली के वसंत विहार इलाके में चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया था और लगभग 15 दिन बाद पीड़िता की सिंगापुर के एक अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में छठे आरोपी राम सिंह ने मामले की सुनवाई शुरू होने के बाद तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी, जबकि पांचवें आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसे तीन साल की सजा पूरी होने पर 2015 में रिहा कर दिया गया था।