निर्भया केस में दोषियों को फांसी देने की चौथी तारीख आ चुकी है। चारों दोषियों मुकेश, अक्षय, विनय और पवन को 20 मार्च सुबह 5.30 बजे फांसी होनी है। हालांकि अब भी चारों दोषी अपने बचाव के लिए न्यायालय की शरण में हैं। अगर 20 मार्च को इन्हें फांसी होती है तो पिछले सात साल से चल रही निर्भया को न्याय दिलाने की लड़ाई अपने अंजाम तक पहुंच जाएगी।
निर्भया केसः पहली बार रेप केस में हुआ था DNA टेस्ट, दोषियों के दांतों की भी हुई जांच, ये थे अहम सबूत
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उस घटना और पीड़िता की हालत के बारे में सोचकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। पीड़िता का इलाज करने वाले चिकित्सकों ने एक बार बातचीत में कहा था कि ऐसी घटना उन लोगों ने अपने 20 से 30 वर्ष के चिकित्सीय पेशे में कभी नहीं देखी। डॉक्टरों का कहना था कि वे उस घटना को बार-बार याद नहीं करना चाहते। पीड़िता के इलाज में शामिल रहे डॉ. एमसी मिश्रा का कहना था कि पीड़िता के साहस और सकारात्मक सोच की वजह से डॉक्टरों को इलाज करने में मदद मिली। अपनी हिम्मत की वजह से ही वह कई दिन तक मौत से लड़ी।
क्या थे चिकित्सकीय सबूत?
आरोपियों को सजा दिलाने के लिए यूं तो काफी सबूत और गवाह थे लेकिन पहली बार दुष्कर्म के मामले में आरोपियों, पीड़िता व घायल युवक के खून की जांच के लिए डीएनए टेस्ट कराए गए, जो अदालत में बड़े सबूत बने। आरोपियों के दांतों की जांच भी सफदरजंग अस्पताल में कराई गई, क्योंकि पीड़िता के शरीर पर कई जगह दांत से काटने के निशान थे। फॉरेंसिक जांच के अलावा निर्भया के खून से सने कपड़ों और आरोपियों का मेडिको लीगल केस (एमएलसी) भी सबूत बना।
• चेहरे पर दांत से काटने के निशान
• छाती और गले पर नाखून से काटने के निशान
• पेट पर नुकीली वस्तु से गंभीर चोट
• प्राइवेट पार्ट्स पर तेज चोट के निशान
• लोहे की रॉड शरीर के अंदर डाली
• बच्चेदानी का कुछ हिस्सा प्रभावित हुआ था
• रॉड की वजह से छोटी आंत पूरी तरह से बाहर आ गई थी
• बड़ी आंत का भी काफी हिस्सा प्रभावित हुआ
• कमर के पास धारदार हथियार से कट के निशान
• पीठ और पैर में मामूली चोट के निशान
तेजी से फैल रहा था संक्रमण
पीड़िता का इलाज करने वाले चिकित्सकों में शामिल डॉ. पीके वर्मा और डॉ. राजकुमार ने बताया था कि उसके पूरे शरीर में संक्रमण फैल गया था। इसको काबू में करना बड़ी चुनौती थी। शुरुआती दौर में संक्रमण को कुछ हद तक काबू भी किया गया, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया स्थिति विकट होती गई। बाद में निर्भया को बचा पाना मुश्किल हो गया था। भारत में पांच सर्जरी करने के बाद 26 दिसंबर की रात उसको एयर एंबुलेंस से सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल भेजा गया।