आंध्रप्रदेश के पूर्व राज्यपाल व यूपी-उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर तिवारी हत्याकांड की गुत्थी से पुलिस ने भले ही पर्दा उठा दिया हो, लेकिन इस हाई प्रोफाइल केस की जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों के पसीने छूट गए। हालांकि अपूर्वा की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस की राह आसान नहीं होने वाली है। अपूर्वा ने भले ही अपना जुर्म कबूल कर लिया हो लेकिन कोर्ट में इस बात को साबित करने में पुलिस को बहुत मुश्किलें आने वाली हैं।
रोहित शेखर हत्याकांडः अपूर्वा के कबूलनामे के बावजूद, कोर्ट में जुर्म साबित करना होगा मुश्किल
शे से वकील अपूर्वा अच्छी तरह जानती है कि हत्या के आरोपों से कैसे बचा जा सकता है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि हत्या करने के बाद अपूर्वा ने कमरे में सुबूतों से भी छेड़छाड़ की है। जानकारों का कहना है कि अदालत में अपूर्वा पर हत्या का आरोप साबित करना भी पुलिस के लिए टेढ़ी खीर होगा।
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अपूर्वा ने पुलिस को बयान दिया था कि रोहित के नशे में होने के कारण उसके साथ झगड़ा हुआ था। उसी दौरान गला दब गया, जिससे उसकी मौत हो गई। अपूर्वा का कहना है कि वह उसकी हत्या नहीं करना चाहती थी। जानकारों का कहना है कि कोर्ट में अपूर्वा को इसका फायदा मिल सकता है, कोर्ट में हत्या की बजाय धाराएं गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में तब्दील हो जाएं। हालांकि पुलिस अधिकारी अपूर्वा को रिमांड पर लेकर और सुबूत जुटाने का प्रयास करेंगे।
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गौरतलब है कि शुक्रवार को जैसे ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि रोहित की गला व मुंह दबाकर हत्या की गई है, फौरन हत्या का मामला दर्ज कर जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। शुक्रवार को क्राइम ब्रांच ने रोहित के घर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। पहले दिन की छानबीन के बाद ही पुलिस अधिकारियों को काफी हद तक साफ हो गया था कि रोहित हत्याकांड में उसकी पत्नी अपूर्वा का हाथ है...
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लेकिन उसने हत्या कैसे की और उसमें कौन-कौन शामिल हैं, इसकी जांच करने में पुलिस को पांच दिन लग गए। लंबी छानबीन के बाद पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि वारदात को अपूर्वा ने अकेले ही अंजाम दिया। बाद में बुधवार को उसके कबूलनामे के बाद अपूर्वा को गिरफ्तार कर लिया गया।