दिल्ली के आध्यात्मिक आश्रम से छुड़ाई गईं लड़कियों को जब वहां से आजाद करवाया गया तब उन्होंने यह कहा कि...
उनके लिए सब कुछ उनके बाबा हैं। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि बाबा ने जो शिक्षा दी है उसके आधार पर ही वह पूरी जिंदगी गुजारेंगी। बाबा द्वारा दी गई शिक्षा के खिलाफ वह कुछ नहीं करेंगी। बाहर का खाना, पहनना और किसी से बातें करना यह सब वह नहीं करेंगी। इस वजह से वह चाइल्ड वेलफेयर होम का खाना नहीं खा रही और यूनिफॉर्म से अलग कपड़े पहनने के लिए भी वह नहीं तैयार हैं।
हाल ही में विजय विहार स्थित आश्रम से दिल्ली पुलिस ने 41 नाबालिग लड़कियों को रेस्क्यू कर अलीपुर के मिंडा बाल गृह भेज दिया गया है। वहां की सीनियर काउंसलर के मुताबिक लड़कियां मेड के हाथ का बना खाना खाने के लिए तैयार नहीं है। वहां पहुंचने के बाद पहले दिन तो किसी भी लड़की ने खाना नहीं खाया।
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बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित
नाबालिग लड़कियों के अनुसार, किसी और के हाथ का बना खाना आध्यात्मिक शिक्षा के खिलाफ है। इसे अन्नदोष माना जाता है तो बस इसलिए वह खुद ही अपने हाथों से खाना बनाकर ही खा रही हैं।
बाबा के आश्रम से मिली यूनिफॉर्म के अलावा दूसरे कपड़े भी पहनने के लिए नहीं मान रहीं है। बाल गृह से एक टीम लड़कियों के कपड़े विजय विहार में बाबा के आश्रम से लेकर आई है।