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2017 में खूब चर्चा में आईं ये ऐतिहासिक धरोहरें, कभी इनसे थी दिल्ली की पहचान

Thu, 28 Dec 2017 10:33 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 28 Dec 2017 10:33 AM IST
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flashback 2017: these heritage came in limelight due to several disputes, once were delhis identity
heritage of india - फोटो : अमर उजाला

कहते हैं कि हर बीता हुआ पल इतिहास बन जाता है, लेकिन कुछ ऐसी चीजें होती हैं जो इतिहास बनकर भी सदियों तक याद रखी जाती हैं। इतिहास की ऐसी ही कुछ धरोहरें इस पूरे साल अलग-अलग कारणों से सुर्खियों में बनी रहीं। जानिए हम किन धरोहरों के बारे में बात कर रहे हैं जो किन्हीं विवादों के चलते इस साल चर्चा का विषय बनीं... 

flashback 2017: these heritage came in limelight due to several disputes, once were delhis identity
regal

रीगल सिनेमा- करीब 85 साल पुराने रीगल सिनेमा अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। यह 1932 में शुरू हुआ था। यहां बॉलीवुड और हॉलीवुड दोनों ही फिल्मों का प्रीमियर होता था। कभी राजधानी ही नहीं पूरे देश में मशहूर रीगल सिनेमा इस साल बंद हो गया। हालांकि यह फिर से खुलेगा लेकिन अब उसका स्वरूप बदल जाएगा। अब रीगल सिंगल स्क्रीन थियेटर की जगह मल्टीप्लेक्स बनकर खुलेगा।

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hall of nation

प्रगति मैदान का हॉल नं. 11- आधुनिक वास्तुकला के लिहाज से पूरी दुनिया में मशहूर राष्ट्रीय राजधानी स्थित दो शानदार इमारतें द हॉल और नेशंस और द हॉल ऑफ इंडस्ट्रीज इस साल इतिहास बन गयी। दोनों इमारतों को आधुनिक वास्तुकला का बेहतरीन नमूना माना जाता था। देश की आजादी के 25 साल पूरा होने पर दोनों भवनों का निर्माण यहां प्रगति मैदान में किया गया था। ईटीपीओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई से कहा कि द हॉल और नेशंस और द हॉल ऑफ इंडस्ट्रीज को गिरा दिया है ताकि एक ऐसे अत्याधुनिक परिसर का निर्माण किया जा सके जिससे राजधानी का गौरव बढ़ेगा।

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जंतर मंतर को खाली कराने के दौरान तैनात पुलिस - फोटो : हिमांशु सोनी

जंतर-मंतर हो गया शांत- लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन का बहुत महत्व होता है और इसी का पर्याय बन चुका राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर इस साल शांत हो गया। अनग‌िनत आंदोलनों का गवाह रहा जंतर-मंतर अब मौन है। जंतर-मंतर को खाली किए जाने के एनजीटी के आदेश के बाद पुलिस और स्थानीय निकाय अधिकारियों ने उन तंबुओं तथा अस्थायी ढांचों को हटा दिया जिन्हें पूर्व सैन्यकर्मियों ने वन रैंक-वन पेंशन योजना लागू करने की मांग को लेकर यहां प्रदर्शन के लिए स्थापित किया था। हालांकि यह एक सकारात्मक फैसला है जिससे वहां के रिहायशी लोगों को बहुत फायदा हुआ है।

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qutub minar - फोटो : रतनदीप कपूर

अलाउद्दीन खिलजी का मकबरा- संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के विवादों में आने के बाद दिल्ली स्थित वह जगह भी चर्चा में आ गई जिसे लोग शायद भुला चुके थे। यही नहीं दिल्लीवालों को भी नहीं पता ‌था कि खिलजी वंश के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी का मकबरा दिल्ली में है और वो भी कुतुब ‌मीनार के परिसर में ही। इस फिल्म के विवाद में आने से यह बिसराई हुई इमारत भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई।

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