कहने को हरियाणा के क्षेत्र सुख सुविधाओं से संपन्न कहलाते हैं पर एक गांव ऐसा है जहां महिलाएं मजबूर हैं झोलाछाप डॉक्टरों से अपना प्रसव कराने के लिए। कारण, वहां तीस हजार की आबादी पर एक भी डॉक्टर नहीं है।
इस गांव में झोलाछाप डॉक्टर कराते हैं दिल दहलाने वाला प्रसव
साकरस गांव में तीस हजार की आबादी रहती है पर स्वास्थ्य कर्मी एक भी नहीं है। खंड के सबसे बड़े गांव साकरस ग्राम पंचायत में लगभग नौ हजार मतदाता हैं। कुल 20 वार्ड़ हैं।
इस ग्राम पंचायत के अंर्तगत छह गांव कालखेड़ा, कुलडेहरा, आमका, कालियाबास, मदारीबास, झोंपड़ी भी आते हैं। इस गांव में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने एक उपस्वास्थ्य केंद्र खोला हुआ है लेकिन कर्मचारियों के अभाव में यह बंद पड़ा रहता है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां प्रसव हट तक विभाग की ओर से नहीं बनाया गया है। कई झोलाछाप डॉक्टर घरों में तो कुछ अपनी फर्जी बनी हुई डिस्पेंसरी या क्लिनिक में ही प्रसव करा देते हैं।
गर्भवती महिलाओं का प्रसव यही झोलाछाप डॉक्टर इस तरह से करते हैं कि उनकी दशा खराब हो जाती है। यहां के लोगों का कहना है कि उस दौरान कौन सी दवा और इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल करते हैं कि प्रसूताएं छटपटाती रहती हैं और मजबूर होती हैं।
कई बार महिलाएं मर जाती हैं। उनके और नवजात के साथ अनहोनी तक हो जाती है। कई महिलाओं की इनसे प्रसव कराने के दौरान हालत खराब हो गई तो परिजन अल-आफिया अस्पताल उठा कर ले गए।
लोग बताते हैं कि ये दवाएं तक ओरिजनल नहीं देते। मोटी रकम ले लेते हैं। महिलाएं छटपटाती रहती हैं। साकरस गांव के पूर्व सरपंच फजरुद्दीनबेसर, खुर्शीद अहमद, जाकिरहुसैन, शमीम अहमद ने कहा कि कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मांग की गई है कि वे गांव में पीएचसी बना दें।
उन्होंने कहा कि गांव के उपस्वास्थ्य केंद्र पर एक भी स्वास्थ्यकर्मी न होने की वजह से यह बंद रहता है।
साकरस गांव के लोगों की समस्या और मांग दोनों ही जायज हैं। गांव में एक स्वास्थ्यकर्मी लगाई हुई है। अज्ञात चोरों ने यहां से सामान चोरी कर लिया था। विभाग में स्टाफ की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत करवाया जा चुका है।
-डा. कृष्ण कुमार, एसएमओ, सिविल अस्पताल फिरोजपुर झिरका।