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पहाड़ों के प्यार में छोड़ी एयरफोर्स की नौकरी, एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा

Fri, 04 Mar 2016 04:37 PM IST
Updated Fri, 04 Mar 2016 04:37 PM IST
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Fly flag at mount averest.
tulika - फोटो : ब्यूरो

‘पहाड़ों से प्यार का जुनून इस कदर चढ़ा कि एयरफोर्स की नौकरी छोड़ दी। माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के लिए पैरेंट्स और खुद की सेविंग को भी दांव पर लगा दिया। कई बधाएं पार कीं और 29 मई 2012 को एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा फहराया और गर्व से कहा कि अब पीछे मुड़कर नहीं देखूंगी।’ (सभी फोटो: पप्पू नेहरा/अमर उजाला, गाजियाबाद)


पहाड़ों के प्यार में छोड़ी एयरफोर्स की नौकरी, एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा

Fly flag at mount averest.

ये कहानी है पर्वतारोही तूलिका रानी की। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बृहस्पतिवार को आरकेजीआईटी (डब्ल्यू) में ‘मानसिक और शारीरिक तनाव के प्रबंधन’ विषय पर गेस्ट लेक्चर आयोजित किया गया। तूलिका इसमें बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहीं और छात्राओं को सफलता के टिप्स दिए।

पहाड़ों के प्यार में छोड़ी एयरफोर्स की नौकरी, एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा

Fly flag at mount averest.

माउंट एवरेस्ट के फतह की कहानी को तूलिका रानी ने प्रेजेंटेशन के जरिए दिखाया। कार्यक्रम में एक्स स्क्वार्डन लीडर तूलिका ने कहा कि तनाव जीवन का एक भाग है। इसको कम करने की कोशिश होनी चाहिए, लेकिन अपनी शर्तों पर।


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पहाड़ों के प्यार में छोड़ी एयरफोर्स की नौकरी, एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा

Fly flag at mount averest.

व्यक्ति की सफलता उसके अतीत पर निर्भर करती है। यदि आप शुरुआत में ही असफल होकर हार मानकर बैठ जाएं तो जीवन में कभी सफल नहीं हो सकते। तूलिका का कहना था कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि पर्वतारोही बनेंगी। 2009 में पर्वतारोही की ट्रेनिंग शुरू की। काफी फिजिकल और मेंटल एक्सरसाइज की। 2011 में एयरफोर्स ने एक महिला दल बनाया, जिसे माउंट एवरेस्ट को फतह करना था।

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दल में 20 लोग थे। सफर शुरू हुआ पर मुझे आधे रास्ते से वापस लौटना पड़ा। जब मैं नीचे उतरी तो माउंट एवरेस्ट की तरफ मुड़कर मैने कहा था ‘आई विल कम बैक’। उन्होंने कहा कि जब आप असफल होते हैं तो उसमें 90 प्रतिशत से ज्यादा गलतियां खुद की होती हैं।  मां ने भी मुझे उस वक्त कायर कहा था। तब बहुत बुरा लगा था। दोबारा तैयारी की और 2012 में माउंट एवरेस्ट पर झंडा फहराया।

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