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शिवरात्रि पर मात्र इस मंत्र के जाप से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव, पूरी होती है हर मनोकामना
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
Updated Fri, 24 Feb 2017 09:48 AM IST
सार
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शहर में इस बार महा शिवरात्रि का पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाएगा। शहर के अधिकांश शिवालयों को सजाना शूरू कर दिया गया है। साईं मंदिर डीएलफ फेस-3 के पुजारी आचार्य नूतन देव ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इस बार बेहद ही शुभ दिन पर यह पर्व है।
शिव पूजा
शिवरात्री व्रत की महिमा
इस व्रत के विषय में यह मान्यता है कि इस व्रत को जो जन करता है, उसे सभी भोगों की प्राप्ति के बाद, मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत सभी पापों का क्षय करने वाला है, व इस व्रत को लगातार 24 वर्षो तक करने के बाद विधि-विधान के अनुसार इसका उद्धापन कर देना चाहिए
महाशिवरात्री व्रत का संकल्प
व्रत का संकल्प सम्वत, नाम, मास, पक्ष, तिथि-नक्षत्र, अपने नाम व गोत्रादि का उच्चारण करते हुए करना चाहिए। महाशिवरात्री के व्रत का संकल्प करने के लिये हाथ में जल, चावल, पुष्प आदि सामग्री लेकर शिवलिंग पर छोड दी जाती है।
इस व्रत के विषय में यह मान्यता है कि इस व्रत को जो जन करता है, उसे सभी भोगों की प्राप्ति के बाद, मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत सभी पापों का क्षय करने वाला है, व इस व्रत को लगातार 24 वर्षो तक करने के बाद विधि-विधान के अनुसार इसका उद्धापन कर देना चाहिए
महाशिवरात्री व्रत का संकल्प
व्रत का संकल्प सम्वत, नाम, मास, पक्ष, तिथि-नक्षत्र, अपने नाम व गोत्रादि का उच्चारण करते हुए करना चाहिए। महाशिवरात्री के व्रत का संकल्प करने के लिये हाथ में जल, चावल, पुष्प आदि सामग्री लेकर शिवलिंग पर छोड दी जाती है।
- फोटो : AmarUjala
...महाशिवरात्री व्रत की सामग्री
उपवास की पूजन सामग्री में जिन वस्तुओं को प्रयोग किया जाता हैं, उसमें जल, गंगा जल, पंचामृत (दुध, दही, घी, शहद, शक्कर), जनेऊ, कलावा,बस्त्र, सुगंधित फूल, शुद्ध वस्त्र, बिल्व पत्र, भांग, धतूरा,मदार, दुर्बा, धूप, दीप, नैवेध, चंदन का लेप, ऋतुफल ,तामवूल पत्र,द्रव्य,आदि।
....महाशिवरात्री व्रत की विधि
महाशिवरात्री व्रत को रखने वालों को उपवास के पूरे दिन, भगवान भोले नाथ का ध्यान करना चाहिए। प्रात: स्नान करने के बाद भस्म का तिलक कर रुद्राक्ष की माला धारण की जाती है। इसके ईशान कोण दिशा की ओर मुख कर शिव का पूजन धूप, पुष्पादि व अन्य पूजन सामग्री से पूजन करना चाहिए।
उपवास की पूजन सामग्री में जिन वस्तुओं को प्रयोग किया जाता हैं, उसमें जल, गंगा जल, पंचामृत (दुध, दही, घी, शहद, शक्कर), जनेऊ, कलावा,बस्त्र, सुगंधित फूल, शुद्ध वस्त्र, बिल्व पत्र, भांग, धतूरा,मदार, दुर्बा, धूप, दीप, नैवेध, चंदन का लेप, ऋतुफल ,तामवूल पत्र,द्रव्य,आदि।
....महाशिवरात्री व्रत की विधि
महाशिवरात्री व्रत को रखने वालों को उपवास के पूरे दिन, भगवान भोले नाथ का ध्यान करना चाहिए। प्रात: स्नान करने के बाद भस्म का तिलक कर रुद्राक्ष की माला धारण की जाती है। इसके ईशान कोण दिशा की ओर मुख कर शिव का पूजन धूप, पुष्पादि व अन्य पूजन सामग्री से पूजन करना चाहिए।
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इस व्रत में चारों पहर में पूजन किया जाता है। प्रत्येक पहर की पूजा में उँ नम: शिवाय व शिवाय नम: महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। अगर शिव मंदिर में यह जाप करना संभव न हों, तो घर की पूर्व दिशा में, किसी शान्त स्थान पर जाकर इस मंत्र का जाप किया जा सकता हैं। चारों पहर में किये जाने वाले इन मंत्र जापों से विशेष पुन्य प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त उपावस की अवधि में रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर अत्यन्त प्रसन्न होते है।
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- फोटो : amar ujala
.....शिव अभिषेक विधि
महाशिव रात्रि के दिन शिव अभिषेक करने के लिये सबसे पहले एक मिट्टी का बर्तन लेकर उसमें पानी भरकर, पानी में बेलपत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग को अर्पित किये जाते है। व्रत के दिन शिवपुराण का कथा सुनना चाहिए और मन में असात्विक विचारों को आने से रोकना चाहिए। शिवरात्रि के अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है।
यहां होगी पूजा..
: सिद्वेश्वर मंदिर, घंटेश्वर मंदिर, गुफा वाले मंदिर, प्रेम मंदिर, इंच्छापुरी मंदिर, शीतला मंदिर आदि ।
महाशिव रात्रि के दिन शिव अभिषेक करने के लिये सबसे पहले एक मिट्टी का बर्तन लेकर उसमें पानी भरकर, पानी में बेलपत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग को अर्पित किये जाते है। व्रत के दिन शिवपुराण का कथा सुनना चाहिए और मन में असात्विक विचारों को आने से रोकना चाहिए। शिवरात्रि के अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है।
यहां होगी पूजा..
: सिद्वेश्वर मंदिर, घंटेश्वर मंदिर, गुफा वाले मंदिर, प्रेम मंदिर, इंच्छापुरी मंदिर, शीतला मंदिर आदि ।