तावड़ू स्थित ग्रीन डेल्ज पब्लिक स्कूल में हिंदू बच्चों को इस्लाम के धार्मिक ग्रंथ पढ़ाने का मामला सामने आया है। इस्लामिक ग्रंथ पढ़ाने का मामला पूरे क्षेत्र में फैल गया। जिससे सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन गई है। नाराज अभिवाकों और अन्य लोग शुक्रवार को थाने पहुंचें और स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध रोष प्रकट करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन सतर्क हो गया और विवाद को निपटाने में जुट गया है। शुक्रवार को स्कूल खुलने का समय होते ही अभिभावक स्कूल गेट के बाहर एकत्र हो गए। लोगों के आक्रोश को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने शुक्रवार को स्कूल बंद रखा।
स्कूल में हिंदू बच्चों से अदा कराई नमाज, इस्लामिक ग्रंथ पढ़ाने पर हंगामा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बच्चों के अभिभावकों का आरोप है कि गत 6 जुलाई को स्कूल में ईद मिलन कार्यक्रम के दौरान हिंदू बच्चों को इस्लाम ग्रंथ पढ़ाने के साथ-साथ उनसे नमाज अदा कराई गई है। जिससे उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल संचालक के पास ऐसे कार्यक्रमों के लिए बाहर से पैसा आता है। जिसकी जांच होनी चाहिए और ऐसा करने वाले लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। दूसरी ओर स्कूल संचालक ने अपने ऊपर लगे ऐसे आरोपों को झूठा व निराधार बताया।
अभिभावकों का कहना है कि विशेष समुदाय की एक अध्यापिका ने बच्चों के सिर पर रूमाल रख कर इस्लामिक ग्रंथ पढ़ाया। बच्चे जब घर पहुंचे तो उन्होंने अपने अभिभावचकों को यह सब कुछ बताया। जिसे सुनकर परिजनों में रोष फैल गया और पूरे क्षेत्र में यह खबर फैल गई। शुक्रवार को जैसे ही स्कूल खुलने का समय हुआ शहरवासी व अभिभावक अपना विरोध जताने के लिये स्कूल के बाहर एकत्रित हो गए और स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध जमकर हंगामा किया। जब स्कूल नहीं खुला तो अभिभावक थाने में पहुंच गए। वहां पर शहर के और भी लोग आ गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसील स्तरीय अधिकारी भी थाने में पहुंच गया। तहसीलदार पूनम बब्बर ,थाना प्रभारी जय प्रकाश, नायब तहसीलदार इन्द्रजीत सिंह खंड शिक्षा अधिकारी अनूप सिंह व शहर चौकी प्रभारी राजेन्द्र ने बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश की लेकिन नाराज लोग स्कूल प्रंबधन के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग पर अड़ गए। अंत में स्कूल संचालक ने लिखित व मोखिक तौर पर मांफी मागते हुए भविष्य में इस तरह की गलती नहीं दोहराने की बात कही तब लोगों का गुस्सा शांत हुआ।
इसके पश्चात हुई पंचायत ने फैसला लेते हुए स्कूल संचालक पर 5 लाख 51 हजार रुपये का जुर्माना, दो साल तक स्कूल फीस नहीं बढ़ाने और स्कूल में अध्ययनरत छात्राओं को स्कर्ट के स्थान पर सूट सलवार में आने के निर्देश दिए। स्कूल संचालक ने पंचायत के फरमान को स्वीकार कर लिया। फैसले के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली। इस अवसर महेन्द्र गर्ग राजकुमार मित्तल, चौधरी सवाई सिंह सहरावत, सरपंच फूल सिंह मलिक, सरपंच प्रमोद, पार्षद ज्ञानीराम वर्मा, विनय मलिक, बबली सोनी, मुकेश प्रधान, सुरेश प्रधान, लालचन्द आर्य, फतेह सिंह मास्टर, छतर सिंह सहरावत ,लखपत शर्मा, राधे श्याम सोनी, दीपक सतीजा एडवोकेट, नीटू मेंहदीरत्ता उपस्थित थे।