गुरुग्राम के वैज्ञानिक डॉ श्रीप्रकाश और उनके परिवार की जीवन-लीला समाप्त होने के बाद वर्षों तक परिवार का हिस्सा बनकर रहे चारों कुत्ते भी दुखी हैं। इनके पड़ोसियों ने बताया कि डॉ सिंह परिवार अपने कुत्तों से बहुत प्यार करते थे। वे इन्हें परिवार के सदस्यों की तरह रखते थे।
यही कारण रहा कि इस हादसे के बाद अनाथ हुए चारों कुत्तों को विला नंबर-206 में रहने वाले मल्होत्रा फैमिली अपने घर ले गई थी, लेकिन इन चारों बेजुबानों ने कुछ नहीं खाया। वे बार-बार गेट की तरफ देखते ही रहे। जरा सी आहट होने पर वे उठकर बैठ जाते। उन्होंने पूरी रात इस कदर गुजारी तो मंगलवार को पड़ोसियों की मदद से उन्हें शेल्टर होम में भेज दिया गया।
इस घटना के चश्मदीद रहे सोसायटी के मैनेजर जिले सिंह ने बताया कि सोमवार सुबह पुलिस के आने के बाद जब उन्होंने घर में प्रवेश किया तो देखकर हैरान रह गए। चारों कुत्ते परिवार के चारों लोगों के साथ लिपटे हुए थे। इनको किसी तरह हटाने की कोशिश की गई लेकिन ये हटे तक नहीं। उन्होंने आगे बताया कि डॉ. श्रीप्रकाश के पंखे से झूलते वक्त एक कुत्ता इनकी पैरों के उंगलियों के पास गुमसुम खड़ा हुआ था।
जबकि एक खून से लथपथ डॉ. कोमल उर्फ सोनू सिंह के पेट पर चिपका हुआ बैठा था। वह खुद भी खून से बुरी तरह सना हुआ था, बावजूद वह अपनी मालकिन को नहीं छोड़ रहा था। एक कुत्ता (लोला) अदिति को सबसे प्यारा था। उसने अपने फेसबुक अकाउंट में अपने इस प्रिय कुत्ते के साथ कई फोटो साझा की थीं।
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gurugram murder and suicide
- फोटो : सुदर्शन झा
उन्होंने आगे बताया कि मंगलवार सुबह जब मल्होत्रा परिवार में भी ये चारों गुमसुम बैठे रहे। इन्हें आरडब्ल्यूए और सोसायटी प्रबंधन की मदद से गोल्फ कोर्स रोड स्थित शेल्टर होम में भेज दिया। मंगलवार को परिवार के चारों लोगों की चिताओं में मुखाग्नि देने के बाद परिवार के लोग भी इस बात को लेकर चिंतित थे कि इन बेजुबानों का क्या होगा।