गुरुग्राम के चिनटेल्स पैराडाइसो के डी टावर में बीते गुरुवार को हुए हादसे के चार दिन बाद भी पीड़ित 35 परिवारों को सुरक्षित ठिकाना नहीं मिल पाया है। लोगों के दिलों में इन इमारतों के अचानक ढह जाने की दहशत अंदर तक बैठ चुकी है, इसलिए वह इस सोसाइटी के किसी भी टॉवर को सुरक्षित नहीं मान रहे हैं। पीड़ित परिवार सुरक्षित ठिकाने की तलाश में इधर से उधर चक्कर काट रहे हैं। इन लोगों के पास नकद पैसे और जरूरी दवाएं खत्म हो चुकी हैं।
2 of 5
गुरुग्राम चिंटेल पैराइडाइसो सोसायटी धराशायी
- फोटो : अमर उजाला
चार दिन से कई लोग नहा तक नहीं पाए हैं। किसी भी तरह से परिजनों और खुद की जिंदगी बचाने के संघर्ष में फंसे ये लोग बिल्डर के साथ शासन-प्रशासन से भी नाउम्मीद होने लगे हैं। अब इनका सब्र जवाब देने लगा है। टॉवर में लोगों के प्रवेश बंद और बिजली काट दिए जाने के कारण वह अपने घरों से जरूरी सामान तक नहीं ला पा रहे हैं।
3 of 5
गुरुग्राम चिंटेल पैराइडाइसो सोसायटी में फ्लैट धराशायी
- फोटो : अमर उजाला
सोसायटी निवासी सोनम अरोड़ा ने बताया कि अब उनके पास नकद पैसे और जरूरी दवाएं खत्म हो चुकी हैं। लोगों के क्रेडिट कार्ड सहित अन्य डिजिटल वॉलेट में पैसे खत्म हो चुके हैं। कुछेक ने अपने सिम कार्ड दोस्तों से रिचार्ज करवाएं हैं। हालांकि उन्हें रोजमर्रा के खर्च के लिए नकदी की सख्त जरूरत है, लेकिन अभी तक किसी स्तर से मदद नहीं पहुंची है। पैसों के खत्म होने की बड़ी वजह ये कि उनकी जिंदगी भर की कमाई इन फ्लैटों को खरीदने में लग गई। महीने की कमाई से वह किस्त चुका रहे हैं। अचानक हुए इस हादसे के बाद वह आर्थिक तंगी का शिकार हो चुके हैं।
4 of 5
गंदे रजाई गद्दे लोगों को मुहैया कराए जा रहे हैं
- फोटो : अमर उजाला
स्थानीय निवासी मनीष ने बताया कि हादसे के बाद रविवार को बिल्डर की ओर से खाने की व्यवस्था की गई, लेकिन अभी तक ठहरने का कोई इंतजाम नहीं हो पाया है। जहां ठहराने की जगह का इंतजाम किया गया है, वह नाकाफी है। वहां साफ सफाई नहीं है। रजाई गद्दे, सैनिटाइज तक नहीं कराए गए हैं। टेंट वालों का घटिया सामान यहां पहुंचाया गया है। जिसमें रात नहीं गुजारी जा सकती, इसलिए यह लोग अपने परिचितों और रिश्तेदारों की मदद ले रहे हैं।
5 of 5
गुरुग्राम चिंटेल पैराइडाइसो सोसायटी धराशायी
- फोटो : अमर उजाला
कई बच्चों को आसपास में अपने रिश्तेदारों और परिचितों के यहां भेज दिया गया है ताकि वह सुरक्षित रह सकें। कुछेक के रिश्तेदार यहां मदद देने के लिए पहुंचे हैं। डी टॉवर के आसपास के टॉवरों के लोग भी दहशत में हैं। वह भी यहां रात में ठहरना नहीं चाहते हैं। सभी को एक ही डर है कि अगर यहां रहे तो कल हो न हो...।