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बुलंदशहर हत्याकांड: समय के साथ बदलता रहा खूनी खेल का सरगना, सबसे पहले इन दोनों ने संभाली थी कमान
Tue, 23 Mar 2021 11:04 AM IST
शाहरुख खान
आबाद नकवी, अमर उजाला, बुलंदशहर
आबाद नकवी, अमर उजाला, बुलंदशहर
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 23 Mar 2021 11:04 AM IST
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bulandshahr murder Case
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के ककोड़ थाना इलाके के धनौरा गांव में आरोपी बनाए गए हमलावरों को पुलिस 24 घंटे बाद भी गिरफ्तार नहीं कर सकी है। इस घटना के दूसरे दिन भी गांव में सन्नाटा रहा। गांव में कार पर गोली बरसाकर संदीप की हत्या करने और उसके पिता धर्मपाल, गनर विश्वेंद्र को घायल करने के मामले में आरोपी बनाए गए चार लोगों में दो पहले से ही जेल में बंद हैं।
घटनास्थल पर पूछताछ करते पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाल
गांव निवासी अन्य दो आरोपियों को घटना की साजिश रचने का आरोपी बनाया गया है। पीड़ित के परिजनों का कहना है कि जेल से ही घटना की पटकथा लिखी गई और भाड़े के शूटरों से हत्या को अंजाम दिलाया गया है। रविवार को धर्मपाल, संदीप, रविंद्री, गनर विश्वेन्द्र खेत से कार में चारा लेकर लौट रहे थे। सुबह करीब 9.15 बजे जब वह बुलंदशहर जेवर मार्ग से अपने घर को जाने वाली गली में मुड़ने लगे तो सामने खड़े दो लोगों ने कार पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
जांच करते पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
कार को पीछे करने का प्रयास किया तो पीछे खड़े 6-7 शूटरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। फायरिंग में संदीप, धर्मपाल, गनर विश्वेन्द्र और पास में खड़े पवन पुत्र इंद्रपाल को गोली लगी। गोली लगने से संदीप, धर्मपाल और गनर गंभीर रूप से घायल हो गए। उपचार के दौरान संदीप की मौत हो गई। उसके पिता, गनर की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
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घटनास्थल
- फोटो : अमर उजाला
गांव में अभी भी पुलिस है तैनात
दिनदहाड़े कार पर गोलियां बरसाकर संदीप की हत्या करने और उसके पिता धर्मपाल, गनर विश्वेन्द्र, गांव निवासी पवन को घायल करने की घटना के बाद से ही गांव में दहशत का माहौल है। गांव में दहशत के चलते लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। गांव की गलियों में दूसरे दिन भी सन्नाटा सा पसरा रहा। गांव में गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों की कदमताल और पुलिस वाहनों की आवाज से ही गांव का सन्नाटा टूटता दिखाई दिया। तनाव को देखते हुए अभी गांव में भारी पुलिसबल तैनात है। सीओ नम्रता श्रीवास्तव ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से गांव में पुलिसबल की तैनाती की गई है। स्थिति पर बराबर नजर रखी जा रही है।
दिनदहाड़े कार पर गोलियां बरसाकर संदीप की हत्या करने और उसके पिता धर्मपाल, गनर विश्वेन्द्र, गांव निवासी पवन को घायल करने की घटना के बाद से ही गांव में दहशत का माहौल है। गांव में दहशत के चलते लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। गांव की गलियों में दूसरे दिन भी सन्नाटा सा पसरा रहा। गांव में गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों की कदमताल और पुलिस वाहनों की आवाज से ही गांव का सन्नाटा टूटता दिखाई दिया। तनाव को देखते हुए अभी गांव में भारी पुलिसबल तैनात है। सीओ नम्रता श्रीवास्तव ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से गांव में पुलिसबल की तैनाती की गई है। स्थिति पर बराबर नजर रखी जा रही है।
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विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
समय के साथ बदलता रहा खूनी खेल का सरगना
होली पर्व पर 31 साल पहले धनौरा में दो पक्षों के बीच खूनी रंजिश का खेल शुरू होने के बाद से ही समय के साथ नेतृत्व भी बदलता रहा। सरगना के जेल जाने, गोली का शिकार होने के बाद दूसरा सरगना कमान संभाल लेता था। 1990 में धनौरा में जब दो पक्षों में खूनी रंजिश का खेल शुरू हुआ तो एक पक्ष का सरगना कालीचरण तो दूसरे पक्ष का इंद्र कर रहा था। कालीचरण की बढ़ती उम्र के कारण उसका बेटा जगपाल उर्फ बराती ने कमान संभाल ली।
होली पर्व पर 31 साल पहले धनौरा में दो पक्षों के बीच खूनी रंजिश का खेल शुरू होने के बाद से ही समय के साथ नेतृत्व भी बदलता रहा। सरगना के जेल जाने, गोली का शिकार होने के बाद दूसरा सरगना कमान संभाल लेता था। 1990 में धनौरा में जब दो पक्षों में खूनी रंजिश का खेल शुरू हुआ तो एक पक्ष का सरगना कालीचरण तो दूसरे पक्ष का इंद्र कर रहा था। कालीचरण की बढ़ती उम्र के कारण उसका बेटा जगपाल उर्फ बराती ने कमान संभाल ली।