24 दिन से जिस शख्स को ढूंढने में एक किया जमीन-आसमान, थाने के बाहर खड़ी बस में मिली उसकी सड़ी-गली लाश
राजपाल सिंह के बेटे पंकज ने कविनगर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। तभी से पुलिस और परिजन उनकी तलाश कर रहे थे। रविवार देर रात कविनगर थाने से 100 मीटर की दूरी पर खड़ी सीज की गई एक बस से दुर्गंध आने की सूचना स्थानीय लोगों ने कविनगर पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बस के अंदर जाकर देखा तो सड़ी-गली हालत में शव पड़ा हुआ था। पुलिस ने राजपाल सिंह के परिजनों को सूचना देकर पहचान कराने के लिए बुलाया तो उन्होंने शव की शिनाख्त कर ली।
बेटा बोला सामान्य मौत नहीं पिता की हुई हत्या
शिक्षा विभाग के कर्मचारी राजपाल सिंह की मौत को पुलिस फिलहाल हत्या भले न मान रही हो, लेकिन परिजन पुलिस की थ्योरी से संतुष्ट नहीं है। मृतक राजपाल सिंह के बेटे के मुताबिक उनके पिता की मौत सामान्य नहीं है, उनकी हत्या कर शव को बस में डाला गया है। वहीं पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कोई चोट के निशान न मिलने और मौत का कारण स्पष्ट न होने की वजह से फिलहाल पुलिस इसे सामान्य मौत मान रही है। यही वजह है कि शव मिलने के बाद भी पुलिस की ओर से गुमशुदगी की रिपोर्ट को हत्या की धाराओं में तरमीम नहीं किया गया है।
राजपाल सिंह के बड़े बेटे मनोज उर्फ मोनू चौधरी का कहना है कि उनके पिता के शव पर चोट के निशान पाए गए हैं। एक आंख पर भी चोट लगी थी। खून बिखरा हुआ था। ऐसे में सामान्य मौत कैसे हो सकती है। उनका आरोप है कि पुलिस मामले को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कविनगर पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि थाने के पास 24 दिन उनके पिता का शव पड़ा रहा और पुलिसकर्मियों को इसकी जानकारी तक नहीं लगी। मनोज का आरोप है कि उनके पिता पार्टी से लौटकर सुनसान जगह पर खड़ी बस में अकेले क्यों जाते। उन्हें जबरन वहां ले जाया गया और हत्या का शव फेंक दिया गया।