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बाप और चार बेटियों ने दी जान: एक और नया खुलासा, घर में मिला एक अन्य फोन; परिजनों के आने पर हीरा करता था ये काम
Mon, 30 Sep 2024 08:37 AM IST
शाहरुख खान
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 30 Sep 2024 08:37 AM IST
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delhi suicide
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के वसंतकुंज के रंगपुरी गांव में पिता सहित चार बेटियों की खुदकुशी करने के मामले की जांच में नया खुलासा हुआ है। हीरालाल के परिजन व रिश्तेदार जब मिलने आते थे तो किसी के लिए दरवाजा नहीं खोला जाता था। वहीं, तीन सदस्यीय डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड बनाया गया है जो पांचों शवों का सोमवार को पोस्टमार्टम करेगा।
एक पिता ने अपनी चार दिव्यांग बेटियों के साथ इस इमारत की तीसरी मंजिल पर अपने घर में खुदकुशी कर ली
- फोटो : भूपिंदर सिंह
कर्मचारियों ने बताया है कि हीरालाल दिन की ड्यूटी करता था। वह सुबह सात-आठ बजे आ जाता था। शाम को वह चार-पांच बजे चला जाता था। अस्पताल प्रशासन ने उसे नौकरी से नहीं निकाला था, बल्कि खुद नौकरी छोड़ी थी।
इधर, पुलिस हीरालाल व घर में मिले एक अन्य मोबाइल की डिटेल खंगाल रही है। ये भी जांच की जा रही है कि हीरालाल कहां-कहां और किस-किस से बात करता था। कहीं वह किसी तांत्रिक से तो बात नहीं करता था या फिर उस पर किसी तरह का दबाव तो नहीं था।
इधर, पुलिस हीरालाल व घर में मिले एक अन्य मोबाइल की डिटेल खंगाल रही है। ये भी जांच की जा रही है कि हीरालाल कहां-कहां और किस-किस से बात करता था। कहीं वह किसी तांत्रिक से तो बात नहीं करता था या फिर उस पर किसी तरह का दबाव तो नहीं था।
delhi suicide
- फोटो : एजेंसी
त्योहार पर घर का दरवाजा रहता था बंद
वहीं, पड़ोस में रहने वाले लोगों ने बताया कि उन्होंने कभी हीरालाल के घर पर किसी रिश्तेदार को आते-जाते नहीं देखा। यहां तक की त्योहार के समय भी वह घर का दरवाजा बंद रखते थे। एक महिला ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि वह भी बिहार से हैं। ऐसे में उन्होंने कई बार उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन परिवार ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। हीरालाल पड़ोसियों के साथ रिश्तेदारों से भी कटे रहते थे।
वहीं, पड़ोस में रहने वाले लोगों ने बताया कि उन्होंने कभी हीरालाल के घर पर किसी रिश्तेदार को आते-जाते नहीं देखा। यहां तक की त्योहार के समय भी वह घर का दरवाजा बंद रखते थे। एक महिला ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि वह भी बिहार से हैं। ऐसे में उन्होंने कई बार उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन परिवार ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। हीरालाल पड़ोसियों के साथ रिश्तेदारों से भी कटे रहते थे।
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मृतक हीरालाल का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
दूर की दुकानों से ही लाते थे राशन
घटनास्थल के पास के दुकानदारों ने बताया कि हीरालाल उनके यहां से बहुत की कम जरूरत का सामान लेते थे। अक्सर वह मंडी या मुख्य बाजार से ही सामान लाते दिखते थे। दुकानदार पिंटू ने बताया कि कुछ समय पहले तक उनकी एक बेटी सामान लेने आती थी। वह दूध-दही या चिप्स खरीदती थी, लेकिन जब वह भी चलने में असमर्थ हो गई तो आना बंद कर दिया। हीरालाल ने कभी उधार का सामान नहीं लिया, जितने रुपये होते थे उतना ही सामान खरीदता था।
घटनास्थल के पास के दुकानदारों ने बताया कि हीरालाल उनके यहां से बहुत की कम जरूरत का सामान लेते थे। अक्सर वह मंडी या मुख्य बाजार से ही सामान लाते दिखते थे। दुकानदार पिंटू ने बताया कि कुछ समय पहले तक उनकी एक बेटी सामान लेने आती थी। वह दूध-दही या चिप्स खरीदती थी, लेकिन जब वह भी चलने में असमर्थ हो गई तो आना बंद कर दिया। हीरालाल ने कभी उधार का सामान नहीं लिया, जितने रुपये होते थे उतना ही सामान खरीदता था।
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एक पिता ने अपनी चार दिव्यांग बेटियों के साथ इस इमारत की तीसरी मंजिल पर अपने घर में खुदकुशी कर ली।
- फोटो : भूपिंदर सिंह
आपको बता दें कि दिल्ली के वसंतकुंज इलाके में बुराड़ी जैसा सामूहिक खुदकुशी का मामला सामने आया है। वसंतकुंज के रंगपुरी गांव में पिता ने अपनी चार दिव्यांग बेटियों के साथ सल्फास खाकर खुदकुशी कर ली। बेटियां एक कमरे में मृत मिलीं तो पिता हीरालाल दूसरे कमरे में। एक वर्ष पहले शख्स की पत्नी की कैंसर से मौत होने के बाद बेटियों की देखभाल की जिम्मेदारी उसके ऊपर आ गई थी। इस कारण वह नौकरी पर समय से नहीं जा पाता था। इसलिए उसने नौकरी छोड़ दी थी।