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बाप और चार बेटियों ने की खुदकुशी: हीरालाल को लेकर सामने आया चौंकाने वाला सच, पड़ोसी महिलाओं ने किया ये खुलासा
Sun, 29 Sep 2024 01:05 PM IST
शाहरुख खान
आशीष सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 29 Sep 2024 01:05 PM IST
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Delhi Suicide
- फोटो : अमर उजाला
‘रात ही नहीं, दिन में भी घर से निकलने में डर लग रहा है। जब तक किराये का दूसरा घर नहीं मिलता कुछ दिनों के लिए अपने बच्चों के साथ भाई के घर रहने जा रही हूं।’ यह कहना है वसंतकुंज के रंगपुरी में घटनास्थल के पड़ोस में रहने वाली दीपा का। शनिवार को उनके चेहरे पर खौफ का मंजर साफ नजर आया।
वसंत कुंज स्थित रंगपुरी गांव में घटना स्थल को देखने के लिए इलाके व बिल्डिंग के लोग हैरान दिखे
- फोटो : भूपिंदर सिंह
इधर, इमारत की दूसरी मंजिल रहने वाली रिंकी ने बताया कि जब वह यहां रहने आई थी तो कुछ दिन तक हीरालाल व बेटियों से बात करने की कोशिश की, लेकिन कुछ समय बाद परिवार ने खुद को पूरी तरह से घर में ही कैद कर लिया था। तीसरी बेटी पहले सामान लेने आती-जाती थी, लेकिन अब वह भी कई महीनों से घर पर ही रहती थी। पिता-बेटियों की खुदकुशी ने उन्हें अंदर से झकझोर दिया है। कई बार बेटियों के लड़ने की आवाज आती थी। जब वह उन्हें देखने जाती थी तो बेटियां चुप हो जाती थीं।
मृतक हीरालाल का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
पानी लेने के लिए भी नहीं थी आर्थिक स्थिति ठीक
इमारत में पानी की सप्लाई करने वाले मोंटू ने बताया कि उनके आरओ प्लांट का पानी हर घर पर जाता है, लेकिन हीरालाल ने कभी पानी नहीं मंगवाया। 20 लीटर पानी की बोतल गोदाम से लेने की कीमत 10 रुपये है। घर तक पहुंचाने की कीमत 30 से 40 रुपये होती है। ऐसे में हीरालाल चंद रुपये बचाने के लिए खुद ही साइकिल से पानी लाता था।
इमारत में पानी की सप्लाई करने वाले मोंटू ने बताया कि उनके आरओ प्लांट का पानी हर घर पर जाता है, लेकिन हीरालाल ने कभी पानी नहीं मंगवाया। 20 लीटर पानी की बोतल गोदाम से लेने की कीमत 10 रुपये है। घर तक पहुंचाने की कीमत 30 से 40 रुपये होती है। ऐसे में हीरालाल चंद रुपये बचाने के लिए खुद ही साइकिल से पानी लाता था।
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delhi suicide
- फोटो : एजेंसी
त्योहार पर घर का दरवाजा रहता था बंद
लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी हीरालाल के घर पर किसी रिश्तेदार को आते-जाते नहीं देखा। यहां तक की त्योहार के समय भी वह घर का दरवाजा बंद रखते थे। एक महिला ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि वह भी बिहार से है। ऐसे में उन्होंने कई बार उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन परिवार ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। हीरालाल पड़ोसियों के साथ रिश्तेदारों से भी कटे रहते थे।
लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी हीरालाल के घर पर किसी रिश्तेदार को आते-जाते नहीं देखा। यहां तक की त्योहार के समय भी वह घर का दरवाजा बंद रखते थे। एक महिला ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि वह भी बिहार से है। ऐसे में उन्होंने कई बार उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन परिवार ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। हीरालाल पड़ोसियों के साथ रिश्तेदारों से भी कटे रहते थे।
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एक पिता ने अपनी चार दिव्यांग बेटियों के साथ इस इमारत की तीसरी मंजिल पर अपने घर में खुदकुशी कर ली।
- फोटो : भूपिंदर सिंह
हीरालाल का भाई भी पूरी तरह से दिव्यांग
मोहल्ले में रहने वाली सविता ने बताया कि उन्होंने मृतकों के शव को ले जाते हुए देखा था। हीरालाल का भाई घटनास्थल पर आया था। वह भी पूरी तरह से दिव्यांग है। हीरालाल (46) की चारों बेटियां, नीतू (26), निक्की (24), नीरू (23) और निधि (20) भी चलने-फिरने में असमर्थ थीं। हीरालाल के भाई मोहन शर्मा और भाभी गुड़िया शर्मा ने बताया कि हीरालाल ने अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद पारिवारिक मामलों में रुचि लेना बंद कर दिया था।
मोहल्ले में रहने वाली सविता ने बताया कि उन्होंने मृतकों के शव को ले जाते हुए देखा था। हीरालाल का भाई घटनास्थल पर आया था। वह भी पूरी तरह से दिव्यांग है। हीरालाल (46) की चारों बेटियां, नीतू (26), निक्की (24), नीरू (23) और निधि (20) भी चलने-फिरने में असमर्थ थीं। हीरालाल के भाई मोहन शर्मा और भाभी गुड़िया शर्मा ने बताया कि हीरालाल ने अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद पारिवारिक मामलों में रुचि लेना बंद कर दिया था।