पुलिस अभिरक्षा से कुख्यात विकास दलाल को छुड़ाने आए बदमाश और उनका पीछा कर रहे पुलिसकर्मी के बीच जिस प्रकार गोलियां चली, उससे एक बार तो लोगों को लगा कि किसी फिल्म की शूटिंग हो रही है। जब समझ आया कि मामला फिल्मी नहीं, असली है, तब पब्लिक दहशत में आ गई। इसके बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। अपनी जान बचाने को जिसे जहां जगह मिली, वह वहीं जा छिपा।
शूट आउट एट सिविल अस्पताल: लोग समझते रहे फिल्म शूटिंग है, हकीकत पता चली तो फैली दहशत
कुछ लोगों ने साहस दिखाते हुए बदमाशों को पकड़ने की कोशिश भी की, मगर बदमाशों ने फायर किया तो सब पीछे हट गए। इसके बाद तीनों बदमाश एक ही बाइक पर बैठकर फरार हो गए। बीके सिविल अस्पताल में प्रतिदिन करीब ढाई हजार लोग आते हैं। सुबह 9 बजे ओपीडी शुरू होने के बाद 11 बजे तक काफी भीड़ हो जाती है। बंदी वैन के इंचार्ज सुनील कुमार ने बताया कि 11.10 बजे वह विकास को दांतों के डाक्टर के पास दिखाकर उसे वापस लेकर आ रहा था। हवलदार उसका पर्चा लेकर दवा लेने चला गया था, जबकि वह खुद बंदी का हाथ पकड़कर उसे वैन की ओर ले जा रहा था।
पुलिस वैन से थोड़ा पहले ही विकास ने अचानक तेज झटका दिया और हाथ छुड़ाकर अस्पताल के मेन गेट की ओर भाग लिया। उसने शोर मचाते हुए विकास का पीछा किया। भागते हुए ही उसने अपनी सर्विस रिवाल्वर निकाल कर विकास को चेतावनी दी। इसी बीच आगे खड़े हुए विकास के साथी बदमाश ने तमंचे से फायर कर दिया। यह नकाबपोश बदमाश लगातार फायरिंग करके विकास को कवर देता रहा। नरेश ने भी इस दौरान कई राउंड फायरिंग की, मगर अस्पताल में भीड़ की वजह से वह सीधे गोली नहीं चला पा रहा था। इसी का फायदा बदमाशों ने उठाया और वह निकल भागे।
एक दिन पहले ही बताया था दांतों में दर्द: नीमका जेल में बंदियों के इलाज के लिए स्थानीय बीके अस्पताल से ही एक जनरल फिजिशियन तैनात है। छोटी-मोटी बीमारी की दवा तो बंदियों को वहां मिल जाती है, अगर बड़ी परेशानी होती है कि बंदियों को बीके सिविल अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। विकास दलाल ने रविवार को जेल में डॉक्टर को दांत में दर्द की शिकायत की थी। बताया जा रहा है कि डॉक्टर ने उसे कुछ दवाएं देकर सोमवार को बीके अस्पताल में जांच के लिए रेफर कर दिया था। सोमवार को जेल से बंदियों को बीके अस्पताल में लाया गया। विकास का डॉक्टर से चेकअप करवाने के बाद जब पुलिसकर्मी उसे बस में बैठाने के लिए वापस आ रहे थे तभी वह हाथ छुड़ाकर भाग निकला।
शूट आउट की कहानी...प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी:
1. गोली चलने की आवाज सुनकर पहले तो कुछ समझ ही नहीं आया। इसके बाद जब एक पुलिसकर्मी को दो युवकों के पीछे भागते हुए आते देखा तो मामला समझ गया। मैं खुद भी युवकों के पीछे भागा, मगर तभी मुंह पर कपड़ा बांधे बदमाश ने तमंचे से फायर कर दिया। हालांकि यह फायर हवा में किया गया था, मगर मैं काफी डर गया और वहीं रुक गया। - अजीत सिंह, साइकिल स्टैंड ठेकेदार
2. पुलिस बदमाश एक-दूसरे पर फायरिंग कर रहे थे। समझ ही नहीं आया कि मामला क्या है। पुलिसकर्मी चिल्ला भी रहा था कि बदमाशों को पकड़ों। बदमाशों के हाथ में तमंचा था। लगातार गोलियां चल रही थीं। ऐसे में कौन मदद को आता। फिर जब तक कोई कुछ समझ पाता तब तक बदमाश बाइक पर बैठकर फरार हो गए। - रमेश, छोले-भठूरे वाला
3. दोनों ओर से गोलियां चल रही थीं। इससे सभी दहशत में आ गए थे। कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि कहां जाएं। सड़क किनारे खुले में चाय का ठेला और सड़क पर चलती गोलियां। दिमाग जैसे शून्य हो गया था। इसी बीच रमेश की दुकान पर छोले भठूरे खा रहा एक युवक की पसलियों से खून बहने लगा। यह देखकर आसपास के लोग दहशत में आ गए। - राम, चाय वाला