'देवांश के प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान, पूरे शरीर पर नहीं थे कपड़े'
रयान स्कूल के छात्र प्रज्जवल के खुलासे के बाद कि सभी स्कूली स्टाफ होने के बावजूद किसी ने देवांश को नहीं बचाया।
देवांश के पिता ने भी एक दावा किया है कि देवांश के प्राइवेट पार्ट पर चोट
थी और वहां रुई लगाई गई थी जबकि पूरे शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था।
'देवांश के प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान, पूरे शरीर पर नहीं थे कपड़े'
गौरतलब है कि कल मजिस्ट्रेट को दिए अपने बयान में प्रज्जवल ने बताया कि कैसे स्वीमिंग कोच के टैंक में कूदने से मना करने के बाद वो टैंक में कूदा और देवांश को बाहर निकाला। मजिस्ट्रेट की इस रिपोर्ट के बाद आज दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि कैसे कोई स्कूल इतना लापरवाह हो सकता है। स्कूल कह रहा है कि बच्चा दिमागी रूप से ठीक नहीं है जो कि बेहद गैरजिम्मेदाराना रवैया है। बच्चे के अभिभावकों ने जो बात कही है कि उसके प्राइवेट पार्ट पर रुई लगाई गई थी पुलिस इसकी जांच क्यों नहीं कर रही है।
'देवांश के प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान, पूरे शरीर पर नहीं थे कपड़े'
वहीं देवांश के पिता ने आरोप लगाया है कि उनके पास टैंक के पास के एरिया का पूरा मैप है वहां कैमरे लगे हुए हैं आखिर वो कैमरे उस दिन कहां थे। उनका दावा है कि टैंक का ढक्कन 20 किलो का है उसने कैसे उसे उठाया होगा? वहीं उन्होंने ये भी पूछा कि उसने गिरने से पहले जूते क्यों निकाले? देवांश के पिता बोले मेरे पास 24 सवाल हैं जिनका जवाब कोई नहीं दे रहा। उन्होंने ये भी कहा कि देवांश की बॉडी को जब उन्होंने देखा तो उसके प्राइवेट पार्ट पर लाल निशान थे और वहां कॉटन लगा था। इसीलिए वो चाहते हैं कि मामले की सीबीआई जांच हो और इन सब बातों को ध्यान में रखकर जांच की जाए ना कि उसपर जो रयान स्कूल कह रहा है।
'देवांश के प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान, पूरे शरीर पर नहीं थे कपड़े'
वहीं देवांश को टैंक से बचाने वाले बच्चे के एक खुलासे ने सबको चौंका दिया है। जानिए उसने क्या बताया देवांश की मौत के दिन क्या हुआः रयान स्कूल में कक्षा 1 के छात्र देवांश की मौत के मामले में एक बड़ा खुलासा सामने आया है जिसे खुद दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया बेहद ही लापरवाहीभरा और निर्दयता से भरा बताया है। ये खुलासा किया है देवांश को टैंक से बाहर निकालने वाले कक्षा 11वीं के छात्र प्रज्जवल ने।
'देवांश के प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान, पूरे शरीर पर नहीं थे कपड़े'
प्रज्जवल सहरावत उस रयान इंटरनेशनल स्कूल की लाइब्रेरी में था जब उसने स्कूल के ही माइक पर एक अनाउंसमेंट सुनी।