वित्त मंत्री अरुण जेटली के अध्यक्ष कार्यकाल में दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) की बैठकों का रिकार्ड मंगाने पर हाईकोर्ट ने सोमवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। डीडीसीए मानहानि दीवानी मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अर्जी दायर कर यह रिकार्ड मंगाने का आग्रह किया था। कोर्ट इस मुद्दे पर 31 अक्तूबर को फैसला सुनायेगी।
हाईकोर्ट के संयुक्त रजिस्ट्रार पंकज गुप्ता ने अरविंद केजरीवाल व अरुण जेटली के वकीलों सुनने के बाद अर्जी पर फैसला सुरक्षित रखा लिया। जेटली ने अर्जी का विरोध करते हुये उसे खारिज करने की मांग की थी। उनका कहना था कि केजरीवाल की अर्जी खारिज करने योग्य है क्योंकि उनकी यह अर्जी दायर मानहानि मुकदमे की सुनवाई को लटकाने की कोशिश कर रहे हैं। बता दें कि जेटली ने मुख्यमंत्री केजरीवाल समेत छह आप नेताओं पर 10 करोड़ मानहानि का दावा हाईकोर्ट में ठोक रखा है।
मुख्यमंत्री ने केजरीवाल 1999 से 2014 की अवधि में डीडीसीए की आम इकाई और कार्यकारी समिति या निदेशक मंडल द्वारा आयोजित बैठकों का विवरण मंगाए जाने की मांग की थी। जेटली 2000 से 2013 तक डीडीसीए के अध्यक्ष थे।
कोर्ट के समक्ष केजरीवाल ने कहा था कि वह मानहानि मुकदमे में जेटली से जिरह करना चाहते हैं। इसमें तब विवाद खड़ा हो गया था जब केजरीवाल के पूर्व वकील तथा वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने वरिष्ठ भाजपा नेता के खिलाफ कुछ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था।
वित्त एवं रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने अधिवक्ता माणिक डोगरा के जरिए पेश जवाब में कहा था दीवानी प्रक्रिया संहिता कहती है कि यदि केजरीवाल किसी गवाह या रिकॉर्ड को तलब कराना चाहते हैं तो उन्हें गवाहों की अपनी सूची में उनका उल्लेख करना चाहिए।