रोहिणी कोर्ट परिसर में सोमवार सुबह पेशी के बाद लॉकअप ले जाते समय एक कैदी विनोद उर्फ बाले (31) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। गोलीबारी के बाद मौके पर ही आरोपी अब्दुल खान (18) को दबोच लिया गया। उसने भागने की भी कोशिश नहीं की। अब्दुल के पास से वारदात में इस्तेमाल तमंचा बरामद हो गया है। अब्दुल ने पुलिस को बताया कि विनोद की हत्या करने के लिए उसे नीरज बवानिया गैंग के लड़कों ने सुपारी दी थी।
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rohini firing
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस उपायुक्त ऋषिपाल ने बताया कि सोमवार सुबह जेल में बंद विनोद को पेशी के लिए कोर्ट परिसर में लाया गया था। तीसरी बटालियन में तैनात एएसआई बलराम ने जेल से लाकर विनोद को कोर्ट संख्या 107 में पेश किया। वहां से सुबह 11.15 बजे बलराम विनोद को वापस लॉकअप में बंद करने ले जा रहा था। इस बीच ग्राउंड फ्लोर पर रैंप से नीचे उतरते समय कैंटीन के पास अब्दुल खान अचानक विनोद के पीछे आ गया। उसने तमंचा निकालकर विनोद की कमर से सटाकर गोली मार दी। गोली चलते ही कोर्ट में अफरातफरी मच गई।
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विनोद को तुरंत बाबू जगजीवन राम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। प्रशांत विहार थाने में आरोपी अब्दुल खान ने खुलासा किया कि उसे कुछ दिनों पूर्व विनोद की हत्या करने की सुपारी दी गई थी। हत्या के बाद ही उसे पैसे मिलने थे। आरोपी नीरज बवानिया गैंग के सदस्यों द्वारा हत्या करने की बात बता रहा है। वारदात के बाद से कोर्ट कर्मचारी और और वकीलों में कोर्ट की सुरक्षा को लेकर काफी रोष है।
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आरोपी अब्दुल और मृतक विनोद
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विनोद परिवार के साथ परिवार के साथ ई-ब्लॉक मंगोलपुरी में रहता था। इसके परिवार में माता-पिता, पत्नी व अन्य सदस्य हैं। कई साल पूर्व रोहिणी सेक्टर-3 में विनोद ने धोखाधड़ी कर एक प्लॉट बेचकर लाखों रुपये की हेराफेरी की थी। 2010 में रोहिणी साउथ थाने में विनोद के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज कर लिया गया।
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काफी दिनों तक विनोद पुलिस की आंख में धूल झोंकता रहा, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इधर, जमानत पर रिहा होने के बाद दोबारा वह कोर्ट में पेश नहीं हुआ। पुलिस को दबाव बढ़ा तो इसी 30 अक्तूबर को उसने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट ने विनोद को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।