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सफल अध्यक्ष बनने के लिए राहुल को पलटने होंगे वो पन्ने जिसने बढ़ाई थी इंदिरा और राजीव की परेशानी

Sat, 16 Dec 2017 03:33 PM IST
अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, नई दिल्ली
अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 16 Dec 2017 03:33 PM IST
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congress president rahul gandhi must take these lessons from indira and rajiv gandhi to get success
rahul gandhi - फोटो : रवि बत्रा

कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर शनिवार को पदभार ग्रहण करने वाले राहुल गांधी को कांग्रेस के इतिहास में दबे उन पन्नों को भी ठीक से पढ़ना होगा जिसके पात्रों ने कभी उनकी दादी इंदिरा गांधी और पिता राजीव गांधी की परेशानी बढ़ाई थी। (सभी फोटोः रव‌ि बत्रा)

congress president rahul gandhi must take these lessons from indira and rajiv gandhi to get success
rahul gandhi

एक दौर में इन दोनों को पार्टी के भीतर नए और पुराने नेताओं के बीच तालमेल न बैठा पाने का खामियाजा उठाना पड़ा था। लिहाजा राहुल को अपनी नई टीम और संगठनात्मक ढांचे को लेकर अधिक सतर्कता बरतनी होगी।

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rahul gandhi - फोटो : रवि बत्रा

आमतौर पर कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता गांधी परिवार के प्रति समर्पित रहे हैं लेकिन ऐसा दौर भी आया है जब तेजतर्रार और कुशल राजनीतिज्ञ इंदिरा को भी अपनी अलग पार्टी कांग्रेस आई बनानी पड़ी थी।

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rahul gandhi - फोटो : रवि बत्रा

1967 में इंदिरा को अस्वीकार करने वालों की बड़ी संख्या थी। पार्टी में उस दौर में भी नए पुराने नेताओं के बीच अंतर दिखता था। पार्टी दो हिस्सों में इंडीकेट यानी इंदिरा के करीबी और सिंडीकेट यानी विरोधियों के बीच बंट गई थी। उस दौरान इंदिरा ने राजनीतिक चतुराई दिखाते हुए खुद की इंदिरा कांग्रेस यानी कांग्रेस आई खड़ी की थी। इसका लाभ पार्टी को संगठनात्मक और राजनीतिक तौर पर हुआ। 

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rahul gandhi - फोटो : रवि बत्रा

राजीव ने जब पार्टी की कमान संभाली तो उनके हमउम्र और समकक्ष नेताओं का करीब आना स्वाभाविक था। अरुण नेहरू और अरुण सिंह जैसे करीबियों के चलते उन्हें वीपी सिंह की नाराजगी का सामना करना पड़ा और कांग्रेस की सरकार गिर गई। 1998 में पार्टी की कमान संभालने वाली सोनिया गांधी को भी बीच-बीच में विरोध का सामना करना पड़ा।

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