जो लड़की अपने ही स्कूल में बच्चों को नृत्य सिखाती हो उसे उसके टीचर मार्कशीट में डांस में ही बी ग्रेड दे दें, तो यह निश्चित ही स्कूल और उसके शिक्षकों पर बड़े सवाल खड़े करता है। ऐसे ही चार और सवाल हैं शिक्षकों पर संदेह पैदा करते हैं-
छात्रा सुसाइड केसः स्कूल में नृत्य सिखाने वाली को ही दिया B ग्रेड, ऐसे ही 4 सवाल उठा रहे सिर
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स्कूल में सिखा रही थी नृत्य पर शिक्षकों ने दिया बी ग्रेड
कथक नृत्यांगना के रूप में उभर रही छात्रा को बिरजू महाराज ने भी अपनी शिष्या बनाने की घोषणा कर दी थी। माता-पिता और उनके कथक गुरु बिरजू महाराज ने छात्रा को बड़ा कलाकार बनने के गुण बताए थे। अच्छा नृत्य करने के कारण ही स्कूल के शिक्षकों ने छात्रा को छोटे बच्चों को प्रशिक्षण देने के लिए कहा था। इसके लिए कई दिन छात्रा ने बच्चों को नृत्य का प्रशिक्षण भी दिया था, लेकिन शिक्षकों द्वारा उसे नृत्य और अन्य सांस्कृतिक परीक्षा में बी ग्रेड दिया गया था। इससे उसकी कक्षा ही नहीं अन्य कक्षाओं के छात्र-छात्राएं भी स्तब्ध रह गए थे।
बाथरूम में लगा समय तो खड़ा कर दिया बेंच पर
देश में एक तरफ तो लोगों को जागरूक करने के लिए पैडमैन जैसी फिल्में बनाई जा रही हैं और दूसरी ओर समाज की दिशा तय करने वाले शिक्षक ही समाज को पीछे धकेल रहे हैं। माता-पिता का आरोप है कि छात्रा को मासिक धर्म हुआ था तो वह बाथरूम में गई थी। उसे वहां पर समय लगा और जब वापस आई तो शिक्षक ने कई बार पूछा कि क्या हुआ था जो बाथरूम में इतना समय लगा। छात्रा ने कई बार शिक्षक को इशारों में बताया, लेकिन उसने जानबूझकर उससे मासिक धर्म की बात कहलवाई और फिर भी बेंच पर खड़ा कर दिया। इस कारण अगले दिन छात्रा ने स्कूल जाने से इंकार कर दिया था, लेकिन माता-पिता ने उसे समझाकर फिर स्कूल भेज दिया था। इस संबंध में समाज सेवी डॉक्टर आनंद आर्य कहते हैं कि मासिक धर्म महिलाओं के लिए एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे लेकर खराब मानसिकता को दूर करने के लिए पैडमैन जैसी फिल्मों से लोगों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन कोई शिक्षक छात्रा को अपमानित करता है तो कार्रवाई होनी चाहिए।
भाई को भी छोड़ना पड़ा था स्कूल
छात्रा के भाई ने बताया कि स्कूल में कुछ शिक्षक गलत व्यवहार करते थे और इसका वह विरोध करता था जो शिक्षकों को पसंद नहीं था। इसी कारण शिक्षक उसेे परेशान करने लगे थे। इस कारण 2015 में उसे स्कूल छोड़ना पड़ा और बाकी की पढ़ाई दूसरे स्कूल से करनी पड़ी। उसके स्कूल छोड़ने के बाद जब छात्रा 9वीं में आई तो उन्हीं शिक्षकों ने उसकी बहन को परेशान करना शुरू कर दिया था, लेकिन बहन और माता-पिता इसलिए नहीं बताते थे कि उसे गुस्सा अधिक आता है और वह स्कूल में शिक्षकों से भिड़ जाएगा।
पुलिस की फारेंसिक एक्सपर्ट टीम 20 से 22 घंटे बाद मौके पर जांच पड़ताल करने पहुंची थीं। उस समय पर छात्रा के रिश्तेदार और मीडियाकर्मियों ने कमरे में कई बार सामान को इधर-उधर कर दिया था। परिजनों का आरोप है कि 20 घंटे तक लोगों को सामान न छेड़ने के लिए कहते रहे और बाद में पुलिस अधिकारियों को फोन करके ही बुलाना पड़ा। उसके भी कई घंटे बाद फारेंसिक टीम जांच-पड़ताल करने पहुंची थी।